Category: इंफ्रास्ट्रक्चर
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बीएमसी ने की 426 मकानों के लिए लॉटरी की घोषणा
आईएनएस न्यूज नेटवर्कमुंबई। मुंबई महानगरपालिका ने अति निम्न और निम्न आय वर्ग के लिए 426 घरों की लॉटरी की घोषणा की है। इस लॉटरी के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी और मुंबई शहर में घरों की चाहत रखने वाले बीएमसी की वेबसाइट पर आवेदन भर सकेंगे। (BMC announces lottery for 426 houses)ऑनलाइन आवेदन और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया 16 अक्टूबर, 2025 को सुबह 10 बजे से शुरू होगी। आवेदन की अंतिम तिथि 14 नवंबर, 2025 को शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। शुल्क और जमा राशि उसी दिन रात 11.59 बजे तक जमा की जा सकेगी।लॉटरी ड्रॉ के लिए पात्र आवेदकों की सूची 18 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की जाएगी। ड्रॉ 20 नवंबर, 2025 को शाम 5 बजे आयोजित किया जाएगा और परिणाम 21 नवंबर, 2025 को घोषित किए जाएंगे।बीएमसी की तरफ से सूचित किया गया है कि संपूर्ण सूचना पुस्तिका कल यानी 16 अक्टूबर से वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। अधिक जानकारी के लिए नागरिक लॉटरी हेल्पलाइन 022-22754553 पर संपर्क कर सकते हैं या bmchomes@mcgm.gov.in पर ईमेल कर सकते हैं।बीएमसी को डीसीआर रूल 15 के तहत 4000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों के डेवलप करने से 800 घर प्राप्त हुए हैं। इसमें से अब तक 500 से अधिक घर बीएमसी को हस्तांतरित किए गए हैं। पहले चरण में 446 घरों की लॉटरी निकाली जा रही है। सभी घर 300 वर्ग फीट और उससे अधिक कारपेट के हैं। अधिक जानकारी के मनपा मुख्यालय में सहायक आयुक्त (प्रापर्टी विभाग) के कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। -

जोगेश्वरी पूनम नगर पीएमजीपी कालोनी का होगा पुनर्विकास, 180 वर्ग फीट के बदले निवासियों को मिलेगा 450 वर्गफीट का घर
आईएनएस न्यूज नेटवर्कमुंबई। बीते कई वर्षों से लंबित जोगेश्वरी (पूर्व) पूनम नगर मेघवाड़ी स्थित प्रधानमंत्री अनुदान सहायता परियोजना (पीएमजीपी) कॉलोनी के पुनर्विकास की प्रक्रिया म्हाडा ने शुरू कर दी है। महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के माध्यम से इस कॉलोनी के पुनर्विकास के लिए ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण) ठेकेदार नियुक्त करने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। यहां के निवासियों को 180 वर्गफीट के बदले 450 वर्गफीट कारपेट के घर उपलब्ध कराए जाएंगे। (Jogeshwari Poonam Nagar PMGP Colony will be redeveloped, residents will get 450 sq ft house instead of 180 sq ft)पूनम नगर पीएमजीपी कॉलोनी करीब 27,625 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हुई हैं। चूंकि पूनम नगर पीएमजीपी कॉलोनियों का पुनर्वास ईपीसी ठेकेदार की नियुक्ति करके म्हाडा के माध्यम से किया जा रहा है, इसलिए इस पुनर्विकास परियोजना के माध्यम से लगभग 984 परिवारों को आधुनिक फ्लैटों में पुनर्वासित किया जाएगा। 1990-92 के दौरान प्रधानमंत्री अनुदान सहायता परियोजना के तहत बनाई गई इस कॉलोनी में भूतल + 4 मंजिल वाली कुल 17 इमारतें हैं। इस कॉलोनी में कुल 984 भूस्वामी जिसमें 942 निवासी और 42 गैर-निवासी रहते हैं। स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार करीब तीन दशक पहले बनी ये इमारतें बेहद जर्जर हालत में हैं।जोगेश्वरी पूनम नगर पीएमजीपी कॉलोनियों में गृह निर्माण सोसायटियों द्वारा पुनर्विकास परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए वर्ष 2010 में एक डेवलपर को नियुक्त किया गया था, लेकिन डेवलपर द्वारा पुनर्विकास परियोजना को लंबे समय से रोक दिया गया था। इसके कारण इमारतें जीर्ण-शीर्ण और खतरनाक हो गई थीं। गृह निर्माण सोसायटियों द्वारा एक ज्ञापन के माध्यम से सरकार को इस बारे में सूचित किया गया था और परियोजना को म्हाडा के माध्यम से कार्यान्वित करने का अनुरोध भी किया गया था। निवासियों के अनुरोध के अनुसार, सरकार ने 15 दिसंबर, 2020 को डेवलपर की नियुक्ति रद्द कर दी और निर्देश दिया कि परियोजना को म्हाडा के माध्यम से कार्यान्वित किया जाए। साथ ही इन निर्देशों के अनुसार, 20 जून, 2022 को सोसायटी द्वारा नियुक्त डेवलपर के साथ त्रिपक्षीय समझौता रद्द कर दिया गया और 2 नवंबर, 2023 को पुनर्विकास परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए म्हाडा के माध्यम से एक अन्य निजी डेवलपर, यानी सी एंड डीए (निर्माण और विकास एजेंसी) को नियुक्त करके समूह पुनर्विकास परियोजना को कार्यान्वित करने का प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत किया गया था। सरकार ने उक्त प्रस्ताव को संशोधित करने और विनियमन 33 (5) के तहत इसे लागू करने का निर्णय लिया। सरकार की मंजूरी के अनुसार, म्हाडा के मुंबई बोर्ड द्वारा 2 जुलाई, 2024 और 6 सितंबर, 2024 को निविदाएं प्रकाशित की गईं, लेकिन इन निविदाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। इस संदर्भ में, इस परियोजना को सीधे म्हाडा के माध्यम से कार्यान्वित करने का प्रस्ताव 4 अप्रैल, 2025 को सरकार को प्रस्तुत किया गया था। 28 मई, 2025 को सरकार से प्राप्त अनुमोदन के अनुसार, ईपीसी ठेकेदार की नियुक्ति के लिए निविदा प्रक्रिया 16 जून, 2025 को वेबसाइट पर प्रकाशित की गई है। उक्त परियोजना के लिए निविदाएं प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 2025 है। -

मस्जिद बंदर का कर्नांक ब्रिज और विक्रोली ब्रिज यातायात के लिए तैयार, लोकार्पण की तारीख तय होना बाकी
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका द्वारा बनाए जा रहे मस्जिद बंदर स्थित कर्नांक ब्रिज यातायात के लिए पूरी तरह से तैयार हो गए हैं। बीएमसी के अनुसार इन ब्रिजों का लोकार्पण की तारीख का इंतजार किया जा रहा है। (Masjid Bunder’s Carnac Bridge and Vikhroli Bridge are ready for traffic, inauguration date is yet to be decided)
मस्जिद बंदर रेलवे स्टेशन और पी. डी. मेलो रोड को जोड़ने वाले कर्नाक फ्लाईओवर और मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को जोड़ने वाले विक्रोली रेलवे स्टेशन के पास दोनों ब्रिज का निर्माण पूरा हो गया है है। मुंबई ट्रैफिक विभाग के साथ समन्वय करके दोनों पुलों को यातायात के लिए खोलने की तिथि जल्द ही निर्धारित की जाएगी। इससे मुंबई में परिवहन को और अधिक गति मिलेगी।मुंबई में सुचारू यातायात प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए बीएमसी ने महानगर में विभिन्न सड़कों, रेलवे लाइनों, पैदल पुलों, स्काई ब्रिज आदि पर फ्लाईओवर का निर्माण किया है। बीएमसी के सेतु विभाग ने कुछ नए पुलों का निर्माण किया है, जबकि कुछ और पुलों पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसमें कर्नाक रेलवे फ्लाईओवर और विक्रोली रेलवे फ्लाईओवर भी शामिल हैं।बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर (BMC Additional Commissioner Abhijit Bangar) ने ब्रिज विभाग के साथ समन्वय करके कर्नाक ब्रिज और विक्रोली ब्रिज दोनों के निर्माण, सिविल कार्यों और सहायक कार्यों के लिए समय सीमा तय की है। इस पृष्ठभूमि में, पिछले कुछ दिनों में काम में तेजी आई है। बांगर ने गुरुवार, 22 मई की रात को कर्नाक ब्रिज परियोजना स्थल का दौरा किया और प्रगति की समीक्षा की।बांगर ने कहा कि मध्य रेलवे द्वारा खतरनाक घोषित किए गए कर्नाक ब्रिज का पुनर्निर्माण बीएमसी ने किया है। इस पुल का पुनर्निर्माण मस्जिद बंदर क्षेत्र के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों को जोड़ने वाले मौजूदा संपर्क को बनाए रखने के लिए किया गया है। रेलवे सीमा के भीतर पुल की लंबाई 70 मीटर, पूर्व की ओर (पी. डी’मेलो रोड) 155 मीटर और पश्चिम की ओर (मोहम्मद अली रोड) 255 मीटर है।वर्तमान में, कर्नाक ब्रिज के दोनों ओर पक्की पहुंच सड़कें बनकर तैयार हो चुकी हैं। पश्चिमी ओर डेक स्लैब का काम भी पूरा हो चुका है। पूर्वी तरफ 80 मीटर में से 40 मीटर लंबे डेक स्लैब का काम पूरा हो चुका है और इसका क्योरिंग पीरियड चल रहा है। शेष 40 मीटर के लिए “अर्ली स्ट्रेंथ कंक्रीट” का उपयोग किया गया है। ताकि 5 जून 2025 तक क्यूरिंग अवधि पूरी हो जाए। रेलवे सीमा के अंदर एंटी क्रैश बैरियर लगाने का काम चल रहा है। कुल मिलाकर पुल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। शेष कार्य जैसे पेंटिंग, दिशासूचक संकेत, बिजली के खंभे, थर्मोप्लास्टिक, कैट आई आदि का कार्य शुरू कर दिया गया है। ये सभी कार्य 10 जून 2025 तक पूरे हो जाएंगे। बांगर ने कहा कि सभी कार्य पूरे होने और कोई बाधा न होने के बाद, पुल की मजबूती, स्थिरता और सुरक्षा की जांच के लिए लोड टेस्ट किया जाएगा।अभिजीत बांगर शुक्रवार, 23 मई को विक्रोली फ्लाईओवर परियोजना स्थल का दौरा किया और कार्य की समीक्षा की। उन्होंने ने कहा कि पूर्वी उपनगर विक्रोली में रेलवे लाइन के ऊपर फ्लाईओवर पूर्व-पश्चिम क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। यह पुल विक्रोली के पश्चिम में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग और पूर्वी क्षेत्र में ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को जोड़ेगा। इस फ्लाईओवर से यात्रा का समय लगभग 30 मिनट कम हो जाएगा।वर्तमान में विक्रोली फ्लाईओवर के पूर्वी हिस्से का सारा काम पूरा हो चुका है। पश्चिमी ओर मैस्टिक डामर का काम चल रहा है। पुल के दोनों ओर दुर्घटना रोधी अवरोधक और ध्वनि अवरोधक लगाने का कार्य अंतिम चरण में है। रंग-रोगन और बिजली के खंभे लगाने का काम भी शुरू हो गया है। पश्चिम दिशा में ढलान तीव्र है, जहां पुल लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से मिलता है। इस क्षेत्र को कंक्रीट भरकर ऊंचा किया गया है। ताकि तेज गति से चलने वाले वाहनों से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सके। इस कंक्रीटिंग की क्योरिंग तिथि 30 मई 2025 तक पूरी हो जाएगी। साथ ही पुल के सहायक कार्य भी पूरे हो जाएंगे। कुल मिलाकर, 31 मई 2025 तक सभी पुल निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ऐसा विश्वास श्री बांगर ने व्यक्त किया है। -

वर्ली में सड़क विस्तारीकरण को लेकर नागरिकों ने किया प्रदर्शन
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई. वर्ली के पूनम चेंबर के पास मारकंडेश्वर नगर में कोस्टल रोड को जोड़ने वाले प्रस्तावित सड़क विस्तारीकरण योजना को लेकर आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने मुंबई महानगरपालिका के खिलाफ सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया. स्थानीय निवासियों के अनुसार वर्तमान में 14 फीट चौड़ी सड़क का विस्तार कर बीएमसी 18.30 मीटर चौड़ी करना चाहती है. इससे 168 निवासी और अनिवासी झोपड़ा धारकों के घर पर मनपा का हथौड़ा चल सकता है. (Citizens protest against road expansion in Worli)
मनपा सड़क विभाग ने प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई और लंबाई बढ़ाने के लिए शनिवार को मारकंडेश्वर नगर में नोटिस लगाया है. इस नोटिस में कहा गया है कि जिनके पास घर के वैध कागजात है वे बीएमसी डी विभाग में जमा कराएं. नहीं तो उनके झोपड़ों को अवैध मानकर 7 दिन के भीतर तोड़ दिया जाएगा.
आरटीआई कार्यकर्ता संतोष दौड़कर ने कहा कि सड़क विस्तार करने की योजना बनाते समय नियमों का पालन नहीं किया गया. नागरिकों से आपत्ति और सुझाव मंगाए बिना योजना तैयार कर ली गई. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. स्थानीय निवासियों की तरफ से सड़क विस्तारीकरण की कोई मांग नहीं की गई थी. बीएमसी के पूर्व आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने इस योजना को सीधे मंजूरी दी थी जिसे वर्तमान आयुक्त भूषण गगरानी आगे बढ़ा रहे हैं.
दौंडकर ने आरोप लगाया कि आरएल सड़क को पास के नाले के ऊपर से आसानी से बनाया जा सकता है. लेकिन चार-पांच स्लम सोसाइटीज और बड़े डेवलपर्स जिनकी नजर इन झोपड़ों पर है उनके दबाव में झोपड़ावासियों को विस्थापित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि वर्तमान रोड़ 14 फीट चौड़ा और 200 फीट लंबा है. सड़क विस्तार करने के लिए 60 फीट चौड़ा और 500 मीटर लंबा किया जाने वाला है. इससे 168 झोपड़ा वासियों का घर तोड़ दिया जाएगा.उन्होंने कहा कि मारकंडेश्वर नगर के बगल में मनपा इंजीनियर विभाग की कॉलोनी और आरे डेयरी मिल्क की जमीन है. इस पर बड़े बिल्डरों की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है.
वहीं बीएमसी अधिकारी ने कहा कि सड़क का विस्तार आवश्यक है. सड़क का विस्तार होने के बाद यह कोस्टल रोड से जुड़ जाएगा. डॉ एनी बेसेंट रोड और बस वे के अलावा प्रस्तावित मनोरंजन खेल मैदान तक पहुंच आसान होगी. दौड़कर ने कहा कि पास के नाले के ऊपर से भी सड़क निकाली जा सकती है. इसलिए हम सब सोमवार 17 फरवरी को मनपा आयुक्त से मुलाकात कर योजना को रद्द करने की मांग करेंगे. बीएमसी ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे तो इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
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भाजपा नेताओं के निशाने पर बीएमसी अधिकारी, पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देश पर दिए गए ठेकों पर लगा रहे भ्रष्टाचार के आरोप
आईएनएस न्यूज नेटवर्कमुंबई. राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने के बाद अब भाजपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देश पर बीएमसी में दिए गए ठेकों में भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर अधिकारियों को घेरने में लग गए हैं. भाजपा नेताओं के निशाने पर मनपा के अतिरिक्त आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर हैं. पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा मुंबई की सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए डांबर की सड़कों का आरसीसी करने का निर्देश दिया था.राज्य में मुख्यमंत्री बदलने के बाद भाजपा अब भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर अधिकारियों पर जांच करने की मांग कर रही है. (BMC officials are being targeted by BJP leaders, accusing them of corruption in contracts given on the instructions of former Chief Minister Eknath Shinde)मुंबई भाजपा अध्यक्ष और बांद्रा पश्चिम से विधायक आशीष शेलार ने सांताक्रुज में सड़क का निरीक्षण कर निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप लगा कर जांच की मांग की. शेलार मनपा आयुक्त भूषण गगरानी से मुलाकात कर सड़की गुणवत्ता पर सवाल उठाए. जबकि बीएमसी पहले सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए बॉम्बे आईआईटी को एजेंसी नियुक्त किया है.आशीष शेलार के बाद अब कुलाबा से भाजपा के पूर्व नगरसेवक मकरंद नार्वेकर ने कुलाबा में आरसीसी सड़कों का काम शुरू नही करने और ठेके में 75 करोड़ रुपए भ्रष्टाचार करने के लिए प्रदर्शन किया. नार्वेकर ने भी मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर और सड़क विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर दी.मुंबई शहर की सड़कों को आरसीसी करने का ठेका जिस ठेकेदार को दिया था उसने काम ही नहीं शुरू किया. बीएमसी लगातार ठेकेदार पर काम शुरू करने का दबाव डाल रही थी. आखिर में बीएमसी ने उसका ठेका रद्द कर 64 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोंक दिया. मामला हाईकोर्ट में चला गया. इस कारण से सड़क निर्माण शुरू करने में विलंब हुआ.नये ठेकेदार की नियुक्ति करने के लिए दोबारा टेंडर जारी किया गया. एक ठेकेदार आया लेकिन उसने पूर्व के ठेकेदार द्वारा दी गई दर से 9% प्रतिशत अधिक दर पर टेंडर भरा. विरोध होने के बाद हुए समझौते में 4% अधिक दर पर ठेका मंजूर किया गया. आरोप है कि इसमें 75 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार किया गया.मनपा अधिकारियों को हटाने की तैयारी?भाजपा नेताओं द्वारा अधिकारियों के खिलाफ अचानक इस आक्रामक रवैए का कारण कहीं अधिकारियों को हटाने के लिए भूमिका तो नहीं तैयार की जा रही है. इन अधिकारियों को वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री रहते हुए मनपा में लाया गया था. अपनी सरकार के दौरान दिए गए कार्यों की अब शिकायत करना और अधिकारियों को टार्गेट पर लेना कुछ अलग रणनीति की तरफ इशारा कर रहे हैं.नींद में बीएमसी का विजिलेंस विभागक्या सच में आरसीसी सड़कों की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है. सड़कों की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी बीएमसी विजिलेंस विभाग पर भी है लेकिन विजिलेंस विभाग क्या काम कर रहा है इसकी जानकारी किसी को नहीं है. बीएमसी विजिलेंस विभाग की जिम्मेदारी आईएएस अधिकारी डी गंगाधरन पर है. लेकिन जब से वे इस पद पर है विजिलेंस विभाग ने सड़कों सहित अन्य प्रोजेक्ट में क्या लापरवाही की गई एक भी मामले पर एक्शन लिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है. यदि भाजपा नेताओं के आरोप सही हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए. लेकिन यह जांच कोविड घोटाले की जांच की तरह नहीं होनी चाहिए. -

देवेन्द्र फडणवीस को यूं ही नहीं कहा जाता इन्फ्रामैन, जलशिवार योजना, एयरपोर्ट, मेट्रो परियोजनाएं के जरिए छोड़ी छाप
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई. देवेन्द्र फडणवीस (Devendra Fadanvis) एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. गुरुवार को वे ऐतिहासिक आजाद मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. लोकसभा चुनाव में हार के बाद निराशा की जगह फडणवीस दोगुने जोश दमखम के साथ महाराष्ट्र में महायुति की सत्ता लाने में जुटे हुए थे. अधिकांश भविष्यवाणी लोकसभा चुनाव परिणाम के अनुरूप ही विधानसभा चुनाव का परिणाम आने की संभावना व्यक्त कर रहे थे लेकिन चुनाव के बाद परिणाम पूरा उल्टा हो गया. दरअसल महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस की छवि इनफ्रामैन की है. इन्फ्रामैन की यह छवि यूं ही नहीं बनी. उन्होंने महाराष्ट्र में इंफ्रा प्रोजेक्ट पर बहुत काम किया. (Devendra Fadnavis is not called Inframan for nothing, he left his mark through Jalshivar Yojana, Airport, Metro projects)
राज्य के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए फडणवीस ने बहुत काम किया.महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में जल संचय और भूजल में वृद्धि के लिए जलशिवार योजना शुरू की थी जो कि बहुत हद तक सफल रही. मुंबई – उपनगरों में (MMR ) में बढ़ती आबादी सहूलियत देने के लिए मेट्रो का जाल बिछाने का निर्णय लिया था. यहां की घोषित 14 मेट्रो परियोजनाओं में तीन तो शुरू भी हो चुकी हैं. नागपुर, पुणे में भी में भी यातायात में सुधार के लिए मेट्रो परियोजना का निर्माण शुरू कराया.
मेट्रो विस्तार, नए हवाई अड्डों और राजमार्गो की कनेक्टिविटी के अलावा कई लंबित परियोजनाओं को पूरा करवाने में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का प्रभावशाली ट्रैक रिकॉर्ड रहा है.
बुनियादी ढांचे में सुधार में नवी मुंबई हवाई अड्डे का विकास, मुंबई को रायगड से जोड़ने के लिए अटल सेतु, मुंबई कोस्टल रोड, एक्सप्रेसवे का निर्माण देवेन्द्र फडणवीस की देन है.
देवेंद्र फडणवीस के प्रयासों से 701 किमी लंबा और 24 जिलों से गुजरने वाला नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण मील का पत्थर साबित हो रहा है. एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी बढ़ने और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है.
एक और महत्वपूर्ण परियोजना अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है, जिसे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी का समर्थन से प्रगति पर है. फडणवीस द्वारा राज्य के लिए शुरू की गई योजनाएं दीर्घकालिक सोच और दृष्टिकोण का नतीजा है.
फडणवीस परियोजना का उद्घाटन करके भूलने वालों में से नहीं हैं. वे लगातार प्रगति की समीक्षा करते हैं. कोशिश रहती है कि प्रोजेक्ट में आने वाली बाधाओं को दूर कर निर्धारित समय में पूरा किया जाए. कई ऐसी परियोजनाएं जिनका काम धीमा अथवा अधूरा है उनके सामने पूरा करने की चुनौती रहेगी.
शरद पवार को दी पटखनी
महाराष्ट्र के धुरंधर नेता और राजनीति के चाणक्य शरद पवार को चारों खाने चित करना राज्य के किसी नेता कूवत नहीं थी. देवेन्द्र फडणवीस ने असंभव को भी संभव कर दिया. वे जो कहते हैं तो करते हैं, इसलिए राज्य की जनता उन पर भरोसा करती है. इस समय उनकी सोच और टक्कर का नेता महाराष्ट्र में कोई नहीं है
उद्धव को सिखाया सबक
महाराष्ट्र की जनता ने भाजपा को स्थायी सरकार बनाने का जनादेश दिया है. देखना है कि पिछले दो कार्यकाल की तरह इस बार कितना सफल होते हैं. 2019 के चुनाव में संयुक्त रुप से विजय मिलने के बाद उद्धव ठाकरे ने जब छल कर कांग्रेस के पाले में बैठ गए तब फडणवीस के कारण उन्हें ऐसा सबक मिला कि पूरी पार्टी मटियामेट हो गई. महाराष्ट्र के चाणक्य शरद पवार भी अपनी पार्टी नहीं बचा पाए.
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बाढ़वन बंदरगाह से पैदा होगीं 12 लाख नौकरियां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी देश के सबसे बड़े बंदरगाह की अधारशिला
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई। प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी गुरुवार को पालघर स्थित बाढ़वन बंदरगाह की आधारशिला रखी. यह बंदरगाह दुनियां के सबसे बड़े और गहरे बंदरगाह में से एक होगा. बंदरगाह के निर्माण पर 76200 करोड़ रुपए खर्च होंगे. बंदरगाह से 12 लाख रोजगार पैदा होंगे. इसी के साथ प्रधानमंत्री ने मछुआरों की आजीविका के लिए 1563 करोड़ रुपये की बंदरगाह और मत्स्य पालन परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि बंदरगाह के विस्तार से पालघर क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल जाएगी. इस अवसर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, अजीत पवार सहित बड़ी संख्या में नेता और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे. (Barhwan port will generate 12 lakh jobs, Prime Minister Narendra Modi laid the foundation stone of the country’s largest port)
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बंदरगाह बनने से अब यह क्षेत्र रेलवे और हाईवे से भी जुड़ जाएगा और इससे इस क्षेत्र में नए कारोबार शुरू होंगे. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यहां जोर देकर कहा कि इस बंदरगाह का लाभ महाराष्ट्र के साथ-साथ इस क्षेत्र के स्थानीय लोगों और उनकी आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा.
छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने पर मांगी माफी
सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माफी मांगी. उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज मेरे और मेरे साथियों के लिए आराध्य देव हैं. प्रतिमा गिरने हम सभी को ठेस लगी हैं. मैं उनके चरणों में शीश झुका का क्षमा मांगता हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का उद्घाटन किया था. उन्होंने कहा कि यह हमारा संस्कार है. जो लोग वीर सावरकर को गाली देते हैं क्या वे भी माफी मांगेंगे.मोदी ने कहा कि यह बंदरगाह देश के व्यापार और औद्योगिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बनेगा. बंदरगाह के विस्तार से क्षेत्र का चेहरा बदल जाएगा और एक नई पहचान बनेगी. साथ ही यह क्षेत्र वेस्टर्न फ्रंट कॉरिडोर, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से भी जुड़ जाएगा. इससे पूरे साल बंदरगाह में कंटेनरों का परिवहन हो सकेगा. यह क्षेत्र पहले अपने किलों के लिए जाना जाता था, अब यह अपने आधुनिक बंदरगाह के लिए जाना जाएगा.
12 लाख नौकरियां पैदा होंगी
मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना का लाभ महाराष्ट्र को मिल रहा है और इसमें महाराष्ट्र का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने इस मौके पर यह भी कहा कि बंदरगाह के विस्तार से इस क्षेत्र में लाखों रुपये का निवेश होगा और करीब 12 लाख नौकरियां पैदा होंगी.केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के विकास के लिए हमेशा बड़े फैसले लिए हैं. महाराष्ट्र का विकास मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसीलिए हमने हाल ही में छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी रायगढ़ जिले के दिघी में एक बंदरगाह औद्योगिक क्षेत्र को मंजूरी दी है. ये महाराष्ट्र के नागरिकों के लिए दोगुनी ख़ुशी की बात है. दिघी पोर्ट औद्योगिक क्षेत्र छत्रपति शिवाजी महाराज के सपने का प्रतीक बनेगा. प्रधानमंत्री कहा, यह बंदरगाह पर्यटन और इको-रिसॉर्ट्स को बढ़ावा देगा.
बंदरगाह परियोजना की विशेषताएं
● बंदरगाह के विस्तार पर 76,200 करोड़ रुपए की लागत आएगी.
● भारत का सबसे बड़ा गहरे पानी का बंदरगाह बनने का विस्तार.
● यह परियोजना विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए व्यापार कनेक्टिविटी को बढ़ाएगी.
● यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के अमृतकाल दृष्टिकोण के लिए बहुत महत्व रखती है.
● पश्चिमी तट पर स्थित एक विस्तार बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों से सीधी कनेक्टिविटी बनाएगा और पारगमन समय और लागत को कम करेगा.
● अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे से सुसज्जित, बंदरगाह में गहरी बर्थ, कुशल कार्गो हैंडलिंग सुविधाएं और आधुनिक बंदरगाह प्रबंधन प्रणाली होगी.
● इस बंदरगाह के निर्माण से भारत के समग्र आर्थिक लक्ष्यों के अनुरूप अमृतकाल के दौरान रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे.
● इस परियोजना से 10 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है.
● स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा दिया जाएगा और उनसे क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास में योगदान की उम्मीद की जाएगी.
● विस्तार बंदरगाह परियोजना में सतत विकास प्रथाओं को शामिल किया गया है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन करने पर ध्यान केंद्रित करती है.
● एक बार परियोजना चालू हो जाने पर, बंदरगाह भारत की समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा और वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा.
● बाढ़वन बंदरगाह परियोजना निजी क्षेत्र के भागीदारों की सक्रिय भागीदारी के साथ बंदरगाह, परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार की एक संयुक्त पहल है. बंदरगाह के चरणों में चालू होने की उम्मीद है, पहला चरण 2028 तक पूरा होने वाला है.
मत्स्य पालन अवसंरचना परियोजना
● प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी कार्यक्रम में 757.27 करोड़ रुपए की महत्वपूर्ण मत्स्य पालन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रख रहे हैं.
● इसमें मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और मछली बाजारों का निर्माण शामिल है.
● यह परियोजना मछली और समुद्री भोजन की कटाई के बाद प्रबंधन के लिए आवश्यक सुविधाएं और स्वच्छता की स्थिति प्रदान करेगी.
● इस पहल को आंध्र प्रदेश, केरल और उड़ीसा राज्यों में भी लागू किया जाना है, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में मछली पकड़ने के उद्योग के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बढ़ाना है. मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर ट्रांसपोंडर की स्थापना का कार्य प्रारंभ हो गया है.
● 364 करोड़ रुपए की लागत से एक लाख मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर ट्रांसपोंडर लगाने की योजना को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया.
● इन स्वदेशी ट्रांसपोंडरों को इसरो द्वारा समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संकट के समय में उन्हें संचार करने में सक्षम बनाने के लिए विकसित किया गया है.
● स्वदेशी ट्रांसपोंडर फंसे हुए मछुआरों को संकट के समय संपर्क करने और सहायता पहुंचाने में मदद करेंगे. -

भायंदर खाड़ी पर बनेगा डबल डेकर ब्रिज, नीचे वाहन उपर चलेगी मेट्रो
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई. एमएमआरडीए MMRDA) भयंदर खाड़ी पर सिंगल पिलर आधारित महाराष्ट्र का पहला डबल डेकर ब्रिज बनाने का निर्णय लिया है. गुरुवार को एमएमआरडीए ने डबल डेकर ब्रिज निर्माण को मंजूरी प्रदान की. Mmrda Approved double-decker bridge on Bhayander Bay, vehicles will run below and metro will run above )
इस ब्रिज के निचले हिस्से पर वाहन और उपरी हिस्से पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी. अधिकारी ने बताया कि इस से वसई में मेट्रो की राह भी आसान हो जाएगी . इस अवसर पर वसई शहर में मेट्रो लाने के लिए मेट्रो लाइन 13 की घोषणा की गई. इसके तहत मीरा-भायंदर को वसई-विरार मेट्रो लाइन से जोड़ने का फैसला किया गया है. यह मेट्रो लाइन वसई, विरार की कुल आबादी और मीरा-भायंदर, वसई के शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए शुरू की जाएगी.
मीरा रोड से विरार तक 23 किमी लंबी मेट्रो लाइन है, जिसमें 20 स्टेशन हैं. अब वसई-विरार शहर के लिए मेट्रो को मंजूरी मिल गई है, लेकिन बीच में खाई होने के कारण सवाल था कि मेट्रो कहां से लाएं. उसके लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा था. वर्तमान में पोर्ट का कार्य प्रगति पर है. वहां एक मेट्रो प्रोजेक्ट है. वहां से मेट्रो पालघर से वसई तक लाने का विकल्प था, लेकिन विधायक हितेंद्र ठाकुर ने प्रस्ताव दिया कि मेट्रो को भायंदर खाड़ी पर प्रस्तावित पुल के माध्यम से लाया जाना चाहिए क्योंकि अन्य मार्ग से प्रोजेक्ट लाने पर महंगे और समय लेने वाले हो सकते हैं. आखिरकार एमएमआरडीए ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी..
इस परियोजना के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) को पहले ही सलाहकार नियुक्त किया जा चुका है. मीरा-भायंदर शहर में फिलहाल मेट्रो लाइन पर काम चल रहा है और वसई-विरार मेट्रो लाइन को उसी लाइन से जोड़ा जाने वाला है. अब भायंदर खाड़ी में प्रस्तावित पुल और मेट्रो एक ही जगह से होकर गुजरेगी. इसके ऊपर एक मेट्रो संरचना और नीचे एक वाहन पुल होगा. दोनों मार्ग एक ही स्तंभ पर होंगे. इससे लागत में भी बचत होने की संभावना है.
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परियोजना प्रभावितों को आवास देने राज्य सरकार ने दी नई नीति को मंजूरी
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के परियोजना प्रभावित लोगों को फ्लैट उपलब्ध कराने की नीति को हरी झंडी दे दी है. परियोजना से प्रभावित पीड़ितों के लिए फ्लैटों के निर्माण को बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया गया है. (The state government has approved a new policy to provide housing to the project affected people)
इस नीति के अनुसार, मुंबई महानगरपालिका, झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण और एमएमआरडीए को अगले 15 वर्षों में पर्याप्त संख्या में परियोजना प्रभावित फ्लैट बनाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करनी होगी. अगले 3-5 साल में कितने परियोजना प्रभावित लोगों को फ्लैट्स की जरूरत है, इसकी इन सभी अथॉरिटीज को समीक्षा करनी है. इस परियोजना को आर्थिक रूप से सक्षम करने के लिए टीडीआर उत्पादन और इसके उपयोग के प्रावधान में भी सुधार की आवश्यकता है.
मुंबई महानगरपालिका, म्हाडा द्वारा कार्यान्वित परियोजनाओं में बनाए गए अतिरिक्त फ्लैटों का उपयोग परियोजना प्रभावित फ्लैटों के रूप में किया जाएगा. मुंबई में अकेले बीएमसी को परियोजना प्रभावितों के लिए तत्काल 30 हजार और आगामी 10 वर्षों में 65000 घरों की आवश्यकता है. मुंबई महानगरपालिका सड़कों का विस्तार, चौड़ीकरण, ब्रिज निर्माण, बॉटल नेक जैसी परियोजनाओं में आने वाले घरों को आवास उपलब्ध कराने में असफल रहने के कारण मंद गति से चल रही हैं.
राज्य कैबिनेट ने राज्य में हरियाली को बरकरार रखने के लिए अवैध रूप से पेड़ काटने के जुर्माने में सुधार किया है. हरे पेड़ या उसकी शाखाओं को काटने पर अब जुर्माने की राशि बढ़ा कर 50 हजार रुपए कर दी हैं. पहले जुर्माने की राशि केवल 1000 रुपया थी. इसके अलावा कैबिनेट ने कई निर्णय लिए हैं.
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कुलाबा से नरीमन प्वाइंट के बीच समुद्र में कनेक्टर ब्रिज बनाने की मिली मंजूरी
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई. कोलाबा, कफ परेड से नरीमन प्वाइंट (Colaba Nariman point Connector Bridge) तक कनेक्टर समुद्री ब्रिज बनाने का लंबे समय से प्रलंबित प्रस्ताव को आखिरकार राज्य सरकार ने गुरुवार को मंजूरी दी दी. पूर्व में बनाए गए ब्रिज की डिजाइन और रूट में कुछ बदलाव किए गए हैं. विधान भवन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर और एमएमआरडी के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. इस नए कनेक्टर से दक्षिण मुंबई में ट्रैफिक की समस्या दूर होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ मुंबईकरों को मनोरंजन का नया मौका मिलेगा. ( Maharashtra Government Given Approval to build a connector bridge in the sea between Colaba and Nariman Point)