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राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर चीन की नई चाल, भारत के इंफ्रा प्रोजेक्ट खतरे में

इनसाइट न्यूज स्टोरी
मुंबई। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को भारी मशीनों पर नई पाबंदियां लगाईं। इसमें पहाड़ी इलाकों में खुदाई करने वाली टनल बोरिंग मशीन (TBM), ऊंचाई पर कंक्रीट छिड़कने वाली मशीनें और समुद्र तल से मिट्टी निकालने वाली मशीनें शामिल हैं।
क्या है नया नियम?
अब चीनी कंपनियों को मशीन भेजने से पहले बताना होगा कि मशीन कहां और किस काम में लगेगी। दस्तावेजों पर शक होने पर निर्यात नहीं होगा। चीन कभी भी भारत को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहता। उसके बयानों में दोस्ती की बाते या हम दोनों पड़ोसी हैं होती हैं लेकिन काम ऐसा करता है कि दुश्मनी बाहर आ ही जाती है।
बुलेट ट्रेन का क्या हुआ?
3100 टन वजनी, 95 मीटर लंबी ये TBM 12 मीटर की सुरंग बनाती है। मुंबई में 21 किमी में से 16 किमी खुदाई TBM से होनी है, 7 किमी ठाणे क्रीक के नीचे। मशीनें अक्टूबर में आनी थीं, लेकिन मार्च में मुंबई पहुंचीं। जुलाई से खुदाई बंद है।
TBM मशीनों के निर्यात पर पाबंदी से कई प्रोजेक्ट अटके
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की 2 TBM मशीनें 17 महीने से चीन में अटकी थीं। ये मशीनें जर्मन कंपनी ने चीन में बनाई थीं। जून 2025 तक कस्टम से नहीं छूटीं, मामला विदेश मंत्रालय तक गया। इस पाबंदी की वजह से कई प्रोजेक्ट अटक गए, या तो डेडलाइन्स आगे बढ़ा दी गई हैं।
अब नए नियम 18 नवंबर से लागू होंगे। हर मशीन के लिए सरकारी लाइसेंस लेना होगा।इससे भारत के मेट्रो, बुलेट ट्रेन और सीमावर्ती प्रोजेक्ट में देरी होगी। चीन को ड़र है कि भारत इन मशीनों का उपयोग बार्डर पर इंफ्रा प्रोजेक्ट बनाने में करेगा। भारत जिस रफ्तार से सीमावर्ती इलाकों में आवागमन के प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है चीन का भय बढ़ता जा रहा है। इस वजह से वह मशीनरी देने में अडंगा डाल रहा है।




