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  • पार्टिसिपेट मुंबई’ से जनभागीदारी को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री फडणवीस

    पार्टिसिपेट मुंबई’ से जनभागीदारी को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री फडणवीस

    इनसाइट न्यूज स्टोरी

    मुंबई। मुंबई के विकास में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए BMC ने ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ नाम से एक नया डिजिटल मंच शुरू किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज BMC सदन में इस पहल का लोकार्पण किया और ‘समग्र’ संस्था के साथ हुए MoU का आदान-प्रदान किया। (Participate Mumbai to Give New Direction to Public Participation CM Devendra Fadnavis)

    इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ सिर्फ CSR फंड जुटाने का मंच नहीं है, बल्कि सरकार, महापालिका, कॉर्पोरेट और सामाजिक संस्थाओं के एक साथ आकर काम करने का प्लेटफॉर्म है। इस पोर्टल पर BMC को जिन क्षेत्रों में मदद चाहिए, उन प्रोजेक्ट्स की जानकारी रहेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, रोजगार, पर्यावरण, पार्क सौंदर्यीकरण और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां, NGO या आम नागरिक अपनी पसंद का प्रोजेक्ट चुन सकेंगे और अपनी योजना भी रख सकेंगे।

    उन्होंने कहा कि CSR में कितना पैसा खर्च हुआ, इससे ज्यादा जरूरी है कि उससे कितना असर हुआ। CSR पार्टनर्स से सरकार को नई टेक्नोलॉजी, आधुनिक मैनेजमेंट और लचीली कार्यप्रणाली का फायदा मिलता है।

    मुख्यमंत्री ने मुंबई में कुपोषण के मुद्दे पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि झुग्गी बस्तियों में बच्चों में कुपोषण, बौनापन अभी भी बड़ी चुनौती है। पोषण का सीधा संबंध बच्चों के दिमागी विकास और पढ़ाई से है, इसलिए इस क्षेत्र में CSR की मदद लेनी होगी।

    BMC को अधिक गतिमान बनाने के लिए ‘समग्र’ के साथ करार अहम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की 1100 ऑनलाइन सेवाओं में से सिर्फ 45-47 सेवाओं से 90% लोगों का काम होता है, इन्हें ही आसान बनाया जा रहा है। बिल्डिंग परमिशन के लिए AI आधारित सिस्टम शुरू किया गया है, ताकि मानवीय दखल कम हो और Ease of Doing Business बढ़े।

    कार्यक्रम में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, महापौर रितु तावडे, उपमहापौर संजय घाडी,कमिश्नर अश्विनी भिडे सहित अतिरिक्त आयुक्त एवं मनपा के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान हिंदुस्तान यूनिलीवर ने 10 नए सुविधा केंद्रों के लिए 25 करोड़ रुपये का CSR फंड BMC को सौंपा।

  • न्यायालयीन आदेशों के बावजूद लंबित तोड़क कार्रवाई पर उठे सवाल, बीएमसी के चार रजिस्टरों की जांच की मांग

    न्यायालयीन आदेशों के बावजूद लंबित तोड़क कार्रवाई पर उठे सवाल, बीएमसी के चार रजिस्टरों की जांच की मांग

    न्यायालयीन आदेशों के बावजूद लंबित तोड़क कार्रवाई पर उठे सवाल, बीएमसी के चार रजिस्टरों की जांच की मांग

     जिम्मेदार अधिकारियों की तय जो जवाबदेही

    प्रमुख संवाददाता

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा शहर में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली अनधिकृत संरचनाओं के खिलाफ की जाने वाली तोड़क कार्रवाई एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है। लेकिन अब इसी प्रक्रिया के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई ऐसे मामलों में, जहां न्यायालयीन कार्यवाही और अपील की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, वहां भी संबंधित विभागों ने अब तक अवैध संरचानाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। (BMC Demolition Delay Despite Court Orders, Demand to Probe 4 Registers)

    सामाजिक कार्यकर्ता सिद्दीक शेख के अनुसार ऐसे लंबित मामलों की पूरी कुंडली बीएमसी के चार महत्वपूर्ण रजिस्टरों में दर्ज है – डिटेक्शन रजिस्टर, नोटिस रजिस्टर, डिमोलिशन रजिस्टर और कोर्ट इंजेक्शन रजिस्टर। इन रजिस्टरों में यह दर्ज होता है कि किस संरचना को कब अवैध पाया गया, उसे कब नोटिस दिया गया, उस पर तोड़क कार्रवाई हुई या नहीं, और क्या उस पर न्यायालय से कोई स्थगन आदेश है या नहीं।

    मनपा की इस कार्यप्रणाली के जानकारों का कहना है कि यदि किसी प्रकरण में न्यायालय ने पहले ही अंतिम आदेश दे दिया है और विभागीय रिकॉर्ड में भी वह अनधिकृत सिद्ध हो चुका है, तो उसके बाद कार्रवाई को लंबित रखने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बचता। ऐसे में यह प्रशासनिक उदासीनता का मामला बन जाता है।

    इसको लेकर अब मांग की जा रही है कि संबंधित वॉर्ड के इन चारों रजिस्टरों की स्वतंत्र और विस्तृत जांच कराई जाए। जांच में यह सत्यापित किया जाए कि कितने मामलों में कोर्ट के आदेश के बावजूद फाइलें धूल खा रही हैं और कितने मामलों में नोटिस देकर कार्रवाई को बीच में ही रोक दिया गया।

     जिम्मेदार अधिकारियों की तय जो जवाबदेही

    मांग में यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में सभी न्यायालयीन उपाय समाप्त हो चुके हैं, उनमें कार्रवाई में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि एक जगह कार्रवाई होती है और दूसरी जगह समान स्थिति वाले मामले में नहीं होती, तो इससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगता है।

    नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की लंबित कार्रवाइयों से न केवल अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि बीएमसी की कार्यप्रणाली पर भी जनता का भरोसा कम होता है। इसलिए लंबित प्रकरणों की सूची, उन पर आए न्यायालयीन आदेश और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए या कम से कम सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

    फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मांग के बाद बीएमसी प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या इन चारों रजिस्टरों की जांच कर लंबित मामलों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

     

  • अब मुंबई होगी फ्लैक्स मुक्त, फ्लैक्स लगाने और बनाने वालों पर होगी एफआईआर

    अब मुंबई होगी फ्लैक्स मुक्त, फ्लैक्स लगाने और बनाने वालों पर होगी एफआईआर

    • इनसाइट न्यूज स्टोरी

    मुंबई।मुंबई को बदसूरत फ्लेक्स और प्लास्टिक के जाल से मुक्त करने के लिए महापौर रितू तावड़े ने बड़ा अभियान शुरू किया है। महापौर की संकल्पना से ‘शाडू बाप्पा दस दिन – फ्लेक्स मुक्त मुंबई 365 दिन’ विशेष मुहिम चलाई जाएगी। (Flex-Free Mumbai: Mayor Ritu Tawde Launches ‘Shadu Bappa 10 Days, Flex-Free Mumbai 365 Days’ Campaign)

    महापौर ने खुद BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर अवैध PVC फ्लेक्स, बैनर, पोस्टर और स्टिकर के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

    सभी दलों को साथ लाएंगी महापौर
    इस मुहिम को राजनीतिक रंग से दूर रखने के लिए महापौर रितू तावड़े खुद सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों को पत्र लिखकर सहयोग की अपील करेंगी। जल्द ही विधायक अमित साटम की मौजूदगी में प्रशासन की संयुक्त बैठक भी होगी।

    मुहिम की 5 बड़ी बातें

    कोई भेदभाव नहीं, सीधा FIR: अवैध बैनर लगाने वालों पर BMC एक्ट 328/328(A) और महाराष्ट्र संपत्ति विरूपण अधिनियम 1995 के तहत कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ी तो FIR भी दर्ज होगी, चाहे वो किसी भी पार्टी का हो।

    QR कोड जरूरी: अब हर अधिकृत बैनर पर लाइसेंस नंबर, वैधता और प्रिंटर का नाम के साथ QR कोड छापना अनिवार्य होगा। आम नागरिक QR स्कैन करके वैधता चेक कर सकेगा। बिना QR वाला बोर्ड तुरंत जब्त होगा।

    प्रिंटर होंगे ब्लैकलिस्ट: बार-बार अवैध फ्लेक्स छापने वाले प्रिंटर्स और एजेंसियों पर सिर्फ जुर्माना नहीं, उन्हें परमानेंट ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

    सिंगल विंडो से बढ़ेगा राजस्व: सभी परमिशन अब Single Window डिजिटल सिस्टम से मिलेंगी। इससे BMC का करोड़ों का डूब रहा लाइसेंस राजस्व बचेगा।

    72 घंटे में शिकायत का निवारण: नागरिक 1916 हेल्पलाइन या mybmc App पर शिकायत कर सकते हैं। 72 घंटे में कार्रवाई करनी होगी। हर वार्ड की कार्रवाई और जुर्माने का साप्ताहिक डैशबोर्ड सीधे महापौर को सौंपा जाएगा।

    जैसे हम गणेशोत्सव में शाडू मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देकर पर्यावरण का संदेश देते हैं, वैसे ही साल भर प्लास्टिक और PVC कचरे को रोकना हम सबका कर्तव्य है।”  महापौर रितु तावड़े

  • UP में कांग्रेस की घर वापसी, ब्राह्मण मुस्लिम, दलित चेहरे पर लगाया दांव

    UP में कांग्रेस की घर वापसी, ब्राह्मण मुस्लिम, दलित चेहरे पर लगाया दांव

    अमित तिवारी 

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने आखिरकार वो फैसला ले ही लिया जिसकी चर्चा पिछले 6 महीने से थी। पार्टी ने भूमिहार बिरादरी से आने वाले अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर प्रतापगढ़ की रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा मोना को नई प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। उनके साथ सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। (  Congress Goes Back to Brahmin-Muslim-Dalit Formula to Counter BJP)

    ये बदलाव छोटा नहीं है। कांग्रेस ने सीधा संदेश दिया है – हम वापस अपने 80 वाले फॉर्मूले पर जा रहे हैं। कांग्रेस ने इस बार एक-एक कुर्सी सोच-समझ कर बांटी है।

    ये चार नाम क्यों अहम हैं?

    पहला नाम – *आराधना मिश्रा मोना*। ये सिर्फ विधायक नहीं हैं। ये कांग्रेस के सबसे पुराने सिपाही प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी 9 बार उसी रामपुर खास सीट से जीते हैं, जिस पर अब उनकी बेटी लगातार तीसरी बार जीत रही है। ब्राह्मण समाज से आती हैं और महिला भी हैं। यूपी में रीता बहुगुणा जोशी के बाद इतने बड़े पद पर कोई ब्राह्मण महिला नहीं पहुंची थी।

    दूसरा नाम – *इमरान मसूद*। पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा। सहारनपुर से सांसद हैं। उनकी जुबान और जनाधार दोनों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें लाकर कांग्रेस ने 19% मुस्लिम वोट बैंक को सीधा मैसेज दिया है।

    तीसरा और चौथा नाम – *देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद*। दोनों को सीनियर उपाध्यक्ष बनाया गया है। देवेंद्र निषाद निषाद समाज से हैं जो पूर्वांचल में 15-20 सीटों पर निर्णायक है, और आलोक प्रसाद दलित समाज से। ऊपर से प्रभारी पहले से ही दलित नेता *राजेंद्र पाल गौतम* हैं।

    मतलब पूरी टीम देखो तो – ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित, पिछड़ा। यही वो चार पिलर थे जिन पर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर में कांग्रेस की सरकार टिकी थी।

    कांग्रेस का कोर वोटर टूटा कैसे था?

    कभी यूपी में नारा चलता था – ब्राह्मण, बनिया, हरिजन और मुसलमान, यही हैं कांग्रेस की शान। लेकिन 1990 के बाद सब बिखर गया। मंडल कमीशन के बाद पिछड़ा वर्ग जनता दल और फिर सपा-बसपा में चला गया। बाबरी मस्जिद के बाद मुस्लिम सपा की तरफ चला गया। कांशीराम के आने के बाद दलित बसपा का हो गया और ब्राह्मण धीरे-धीरे भाजपा में शिफ्ट हो गया। नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस 1989 के बाद कभी सत्ता में नहीं लौटी।

    अब मौका कहां दिख रहा है कांग्रेस को?

    पिछले एक साल में भाजपा के अपने सबसे मजबूत वोटर यानी सवर्ण समाज में नाराजगी की खबरें आ रही हैं। दो मुद्दे बड़े हैं। सवर्ण समाज को लगता है कि जिस भाजपा को वर्षों से राष्ट्र के नाम पर वोट देकर जिताते रहे, सत्ता मिलने के बाद वही हमारे साथ छल कर रही है।

    एक है * यूजीसी और विश्वविद्यालयों में आरक्षण का नया रोस्टर*। सामान्य वर्ग के छात्रों को लग रहा है कि नौकरियों में उनके मौके कम हो रहे हैं।

    दूसरा है *एससी-एसटी एक्ट*। जब सरकार ने इस कानून को और सख्त किया तो सवर्ण समाज में यह चर्चा तेज हुई कि इसका दुरुपयोग हो रहा है और भाजपा इस पर कुछ नहीं सुन रही।

    यूपी की करीब 120 सीटों पर ब्राह्मण वोट हार-जीत तय करता है। भाजपा इस नाराजगी को जानती है और इसीलिए उसने भी कई ब्राह्मण चेहरों को आगे किया है। लेकिन कांग्रेस को लगता है कि यह सेंध लगाने का सही वक्त है। अगर ब्राह्मण वोट का 10-15% भी वापस आ गया और मुस्लिम-दलित वोट इंडिया गठबंधन में एकजुट रहा, तो 2027 में तस्वीर बदल सकती है।

    तो क्या ये मास्टरस्ट्रोक है?

    हां, लेकिन आसान नहीं है। अजय राय को हटाना भी रिस्क था। वे वाराणसी में मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं और पूर्वांचल में भूमिहारों में उनकी पकड़ है। इसीलिए पार्टी ने उन्हें दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी देने की बात कही है।

    और दूसरी बात, सिर्फ चेहरा बदलने से वोट नहीं आता। कांग्रेस को जमीन पर बूथ तक संगठन खड़ा करना होगा। आराधना मिश्रा और इमरान मसूद दोनों में एक बात कॉमन है – दोनों के अखिलेश यादव से निजी संबंध अच्छे हैं। इससे 2027 में सपा से सीटों के बंटवारे में कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।

    सीधी बात है – कांग्रेस ने तिजोरी से अपना सबसे पुराना हथियार निकाल लिया है। अब देखना है कि यूपी की जनता इसे कबूल करती है या फिर ये भी एक और प्रयोग बनकर रह जाएगा।

  • मेरा बेटा खून से लथपथ था, फिर भी उसने 180 लोगों को मरने नहीं दिया” – शूरवीर पायलट स्मित मच्छार के माता-पिता का छलका दर्द

    मेरा बेटा खून से लथपथ था, फिर भी उसने 180 लोगों को मरने नहीं दिया” – शूरवीर पायलट स्मित मच्छार के माता-पिता का छलका दर्द

    इनसाइट न्यूज स्टोरी

    मुंबई/ मुंबई के कैप्टन स्मित मच्छार ने वो कर दिखाया जो फिल्मों में भी नहीं होता। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाय दुबई फ्लाइट में 30 सितंबर को सह-पायलट के चाकू हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने 27 बच्चों सहित 180 यात्रियों की जान बचा ली। घाटकोपर (पूर्व) धवलगिरी निवासी इस वीर पायलट के माता-पिता *डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद* ने आज कहा – हमारा बेटा ही असली हीरो है। (My son was drenched in blood, yet he didn’t let 180 people die” – The anguish of brave pilot Smit Machhar’s parents spills over)

    दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में 30 सितंबर को जब सह-पायलट ने कॉकपिट में ही कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से जानलेवा हमला किया, तब हर किसी को लगा अब विमान क्रैश होगा। कॉकपिट खून से भर गया था। लेकिन घाटकोपर के इस मराठी लड़के जो किया, उसने पूरी दुनिया को रुला दिया।

    खून से लथपथ हालत में भी स्मित ने 27 मासूम बच्चों समेत 180 यात्रियों की जान बचा ली और विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करा दी।आज घाटकोपर पूर्व के धवलगिरी में जब मुंबई की महापौर रितु तावड़े उनके घर पहुंचीं, तो स्मित के माता-पिता डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद की आंखें भर आईं।

    माता-पिता ने कहा 

    > “हमें अपने बेटे पर गर्व है। डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर पर गहरे घाव हैं, लेकिन वो अस्पताल में भी सिर्फ यही पूछ रहा था कि ‘सब पैसेंजर ठीक हैं न?’। यही संस्कार हमने उसे दिए थे – अपनी जान से पहले दूसरों की जान। प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी उसकी तारीफ की, इससे बड़ा सम्मान क्या होगा एक माता-पिता के लिए।”

    डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद ने बताया कि स्मित बचपन से ही जिद्दी था, पायलट बनने का सपना देखा और मुंबई की गलियों से निकलकर आज उसने 180 परिवारों को नया जीवन दिया है।

    वार्ड नंबर 132 के इस सुपुत्र की कहानी आज हर मुंबईकर के मोबाइल में वायरल हो रही है। लोग कह रहे हैं – असली हीरो तो यही है। आप भी इस वीर पुत्र को सलाम करने के लिए इस खबर को शेयर करें।

     

  • मुंबई 3.0 ही नहीं मुंबई 4.0 का भी खाका तैयार

    मुंबई 3.0 ही नहीं मुंबई 4.0 का भी खाका तैयार

    इनसाइट न्यूज स्टोरी

    मुंबई। मुंबई का विस्तार सिर्फ नवी मुंबई तक नहीं रुकेगा। MMRDA ने मुंबई 3.0 के साथ मुंबई 4.0 का भी खाका तैयार कर लिया है। अथॉरिटी ने रिकॉर्ड ढाई महीने में 565 गांवों के 2,008 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का Existing Land Use (ELU) सर्वे पूरा कर लिया। यह रिपोर्ट आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई। (Blueprint ready not just for Mumbai 3.0 but also for Mumbai 4.0; MMRDA conducted a 2,008 km survey in two and a half months)

    पहला है – KSC न्यू टाउन यानी मुंबई 3.0 – पेन, उरण और पनवेल के 124 गांव, 324 वर्ग किमी। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, JNPA पोर्ट, अटल सेतु और विरार-अलिबाग कॉरिडोर के कारण ये इलाका सबसे तेजी से डेवलप होने वाला नया शहर होगा।

    दूसरा – और तीसरा जोन है मुंबई 4.0 – इसमें पालघर का नॉर्थ ENA (224 गांव, 1007 वर्ग किमी) और रायगड-अलिबाग का साउथ ENA (217 गांव, 677 वर्ग किमी) शामिल है। पालघर में 40 किमी लंबा समुद्र तट, जंगल और आदिवासी क्षेत्र है तो अलिबाग में बीच, किले और टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं।

    MMRDA ने इस पूरे सर्वे के लिए ड्रोन LiDAR, सैटेलाइट इमेजरी और GIS मैपिंग जैसी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है।

    अब इस डेटा से डिजिटल ट्विन बनाए जाएंगे। ताकि कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट जमीन पर उतारने से पहले उसका ट्रैफिक, बाढ़ और सुविधाओं पर असर परखा जा सके।

    महत्वपूर्ण बात ये है कि 45% इलाका ग्रीन और फॉरेस्ट जोन है। जिसे MMRDA संरक्षित रखेगा। बाकी 55% में ही अफोर्डेबल घर, इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स पार्क, डेटा सेंटर और रोजगार के नए हब बसाए जाएंगे। मुंबई के बाद नवी मुंबई बनी। बढ़ती जनसंख्या के कारण मुंबई का विस्तार मुंबई 3.0 के तौर पर हो रहा है। नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु बनने के बाद विकास कार्य भी तेज हो गया है। अब मुंबई 4.0 विस्तार पालघर तक किया जा रहा है। पालघर में वाढवण बंदरगाह का विकास चल रहख है। इसलिए अब मुंबई चार को पूरे प्लानिंग के साथ बनाया जाएगा।

  • वायु प्रदूषण रोकने बीएमसी ने जारी किया नया एक्शन प्लान

    वायु प्रदूषण रोकने बीएमसी ने जारी किया नया एक्शन प्लान

    इनसाइट न्यूज स्टोरी

    मुंबई। मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए बीएमसी ने ‘वायु प्रदूषण नियंत्रण व कार्यान्वयन एक्शन प्लान-2026’ तैयार किया है। महापौर रितु तावडे, उपमहापौर संजय घाडी और आयुक्त अश्विनी भिडे के आदेश पर सभी 24 वार्डों के सहायक आयुक्तों को इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। (BMC issues new action plan to curb air pollution )

    हर वार्ड में 10 हॉटस्पॉट चिन्हित होंगे
    नए प्लान के तहत हर प्रशासनिक विभाग में कम से कम 10 वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट तय किए जाएंगे। इनकी लाइव लिस्ट और मैप बनाया जाएगा। बड़ी इमारतें, पुनर्विकास प्रोजेक्ट, मेट्रो-रोड के काम, कचरा जलाने की जगह, मलबा डंपिंग और ट्रैफिक जाम वाली जगहों को हॉटस्पॉट में शामिल किया जाएगा। हर हॉटस्पॉट के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी तय होगा।

    निर्माण स्थलों पर सख्ती
    निर्माण और तोड़क कार्रवाई पर 28 सूत्री गाइडलाइन सख्ती से लागू होगी। नियम तोड़ने पर शो-कॉज नोटिस, कामबंदी और सीलिंग तक की कार्रवाई होगी। हर टीम को रोज कम से कम 2 साइट की जांच करनी होगी। तोड़क काम के दौरान बैरिकेडिंग, ताडपत्री या हरे कपड़े से ढंकना और पानी का छिड़काव जरूरी होगा।

    रास्तों की डीप क्लीनिंग
    मानसून के बाद सड़कों पर जमी धूल और कीचड़ हटाने के लिए अक्टूबर के पहले दो हफ्तों में ‘पोस्ट-मानसून डीप क्लीनिंग ड्राइव’ चलेगी। सड़कों, डिवाइडर और चौक की सफाई होगी। जरूरत पड़ी तो रिसाइकल पानी से सड़कों को धोया जाएगा।

    बिल्डर को अपनी साइट के आसपास की सड़क भी साफ रखनी होगी। 4000 sqm तक के प्रोजेक्ट के लिए 100 मीटर, 4000 से 10,000 sqm के लिए 200 मीटर और 10,000 sqm से बड़े प्रोजेक्ट के लिए दोनों तरफ 500 मीटर तक सड़क साफ रखना अनिवार्य होगा।

    मलबा गाड़ियों पर GPS नजर
    मलबा ले जाने वाली गाड़ियां पूरी तरह ढकी होनी चाहिए और सड़क पर आने से पहले टायर धोने होंगे। इसकी निगरानी Mumbai Debris Control and Tracking System (MDCTS) से होगी। RMC गाड़ियों से सीमेंट सड़क पर नहीं गिरना चाहिए।

    कचरा जलाने और गाड़ियों के धुएं पर कार्रवाई
    खुले में कचरा जलाने पर मार्शल और CCTV से नजर रखी जाएगी। जाम वाले रास्तों पर PUC चेकिंग अभियान चलेगा और धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों पर कार्रवाई होगी।

    AQI 200 पार तो GRAP लागू
    AQI पर रोज नजर रहेगी। AQI 200 से ज्यादा होने पर इलाके में डीप क्लीनिंग, पानी का छिड़काव और मिस्टिंग होगी। अगर किसी स्टेशन पर लगातार 3 दिन AQI 300 से ऊपर रहा तो उसके 2 किलोमीटर के दायरे में सभी प्रदूषण फैलाने वाले काम बंद कर दिए जाएंगे। अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे ने सभी वार्डों को हर हफ्ते समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

  • कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर? घाटकोपर के जिस स्कूल में पढ़े, उसी गुरुकुल ने किया सलाम

    कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर? घाटकोपर के जिस स्कूल में पढ़े, उसी गुरुकुल ने किया सलाम

    इनसाइट न्यूज स्टोरी

    मुंबई। मुंबई प्रदेश विद्या सभा के गुरुकुल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को कैप्टन स्मित मच्छर पर गर्व है। प्रबंधन ने अपने गौरवशाली पूर्व छात्र की वीरता को शत-शत नमन किया है।

    फ्लाइट में क्या हुआ था?

    कैप्टन स्मित फ्लाई दुबई की फ्लाइट से इजरायल जा रहे थे। तभी को-पायलट ने उन पर चाकू से हमला किया। हालांकि वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। फिर भी उन्होंने साहस दिखाया। परिणामस्वरूप उन्होंने विमान को संभाला और 174 लोगों की जान बचाई। फिलहाल उनका इलाज यूएई में चल रहा है।

    पूरे देश को प्रेरित किया

    जैसा कि अब पूरा देश जानता है, कैप्टन स्मित ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने घायल होने के बावजूद कर्तव्य निभाया। इसके अलावा उन्होंने सह-पायलट के मिशन को नाकाम किया। इसलिए उनके इस कार्य ने घाटकोपर से लेकर पूरे देश को प्रेरित किया है।

    गुरुकुल का गर्व और संस्कार

    श्री वी. एस. गुरुकुल टेक्निकल हाई स्कूल, घाटकोपर पूर्व में कैप्टन ने पढ़ाई की थी। उन्होंने 2003 में 10वीं तकनीकी शिक्षा पूरी की थी। हमें गर्व है कि हम उनके शुरुआती वर्षों का हिस्सा रहे। हालांकि असली संस्कार घर से आते हैं। हम उनके माता-पिता को नमन करते हैं। उन्होंने ही उनमें साहस और नैतिकता के संस्कार दिए।

    गुरुकुल का मिशन हमेशा चरित्र निर्माण रहा है। कैप्टन का शांत रहकर कर्तव्य निभाना उन्हीं मूल्यों का प्रतिबिंब है। सच्ची शिक्षा सिर्फ उड़ना नहीं सिखाती। बल्कि तूफान में मानव जीवन की रक्षा करना भी सिखाती है।

    Gurukul ने क्या कहा?

    Shri V. S. Gurukul Technical High School ने आधिकारिक पत्र जारी किया है। इसके अनुसार Captain Smit Machchhar 2003 में कक्षा 10 के छात्र थे। उनका नाम Register No. 5424 पर दर्ज है। स्कूल ने इस वीरता पर गर्व जताया है। इसी कारण पूरा गुरुकुल परिवार उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता है। यह गौरव पूरे मुंबई के लिए प्रेरणा है।

     

  • दिवेआगर में बड़ा हादसा : आळंदी की विनर्स अकैडमी के 8 छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत

    दिवेआगर में बड़ा हादसा : आळंदी की विनर्स अकैडमी के 8 छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत

    इनसाइट न्यूज स्टोरीज

    दिवेआगर, रायगढ़ । पुणे के आळंदी स्थित विनर्स अकैडमी फॉर 11th एंड 12th के छात्रों के साथ आज 1 अक्टूबर 2026 को दर्दनाक हादसा हो गया। अकैडमी के 25 लड़के, 17 लड़कियां और 6 शिक्षक यानी कुल 48 लोग पिकनिक के लिए दिघी सागरी, दिवेआगर बीच पर आए थे। (Major Tragedy in Diveagar: 8 Students of Alandi’s Winners Academy Die by Drowning in Sea )

    समुद्र में नहाते समय 8 छात्र तेज लहरों में बह गए और डूब गए। स्थानीय पुलिस, जीवनरक्षक दल और मछुआरों की मदद से सभी 8 छात्रों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

    मृतक सभी 16 साल के और आळंदी, पुणे के रहने वाले थे।

    मृत छात्रों के नाम :
    1. तन्मय दत्तात्रय वहीले
    2. सुमित भरत अहिरे
    3. प्रणव रामदास बनसोडे
    4. कैवल्य सतीश वासनकर
    5. राजवीर युवराज वहीले
    6. यश किरण वानखेडे
    7. सोहम तुकाराम भांडवलकर
    8. कौस्तुभ संदीप दौंड

    पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

  • सभी पार्टियों के विरोध के बावजूद बीएमसी 14 फीट ऊंची झोपड़ियों पर कार्रवाई करने पर अडिग

    सभी पार्टियों के विरोध के बावजूद बीएमसी 14 फीट ऊंची झोपड़ियों पर कार्रवाई करने पर अडिग

    इनसाइट न्यूज स्टोरीज

    मुंबई । कोर्ट के आदेश को ढाल बनाकर BMC ने 14 फीट से ऊंची झुग्गियों पर कार्रवाई से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। आयुक्त अश्विनी भिडे ने वार्ड अधिकारियों को कोई स्थगन आदेश देने से साफ मना कर दिया है। (No Stay On Slum Drive: BMC To Issue Notices From Oct 1 Despite Leaders’ Plea)

    सूत्रों के मुताबिक बीएमसी इसे विशेष मोहिम नहीं, बल्कि रोज के अनधिकृत निर्माण विरोधी एक्शन की तरह करेगी। 1 अक्टूबर से नोटिस बांटने के साथ कार्रवाई। अब तक 4,584 झोपड़ों पर एक्शन शुरू है और 611 को नोटिस जा चुका है।

    शहर की 2.23 लाख झुग्गियों में से 39,111 झुग्गियां 14 फीट से ज्यादा ऊंची मिली हैं। सबसे ज्यादा 31,227 पूर्वी उपनगरों में हैं। इसके अलावा अब भी 14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों की पहचान भी की जा रही है।

    दिलचस्प है कि सत्ता पक्ष भाजपा से लेकर विपक्षी शिवसेना (उबाठा) और कांग्रेस तक – सभी दलों ने आम सभा में इस कार्रवाई का विरोध किया था, लेकिन प्रशासन ने सियासी दबाव को दरकिनार कर दिया है।

    सूत्रों का दावा है कि कार्रवाई करने को राज्य सरकार ने भी हरी झंडी दी है। यह कार्रवाई ग्राउंड+ एक मंजिला झोपड़ों पर नहीं बल्कि जहां तीन से पांच मंजिला झोपड़े बनाए गए हैं उन पर की जाएगी। यह झोपड़े खतरनाक तरीके से बनाए गए हैं इससे दुर्घटना होने का खतरा रहता है।