
इनसाइट न्यूज स्टोरी
नई दिल्ली/रियाद । खाड़ी में एक बार फिर बारूद की गंध तेज हो गई है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर चीनी तकनीक से बनी खैबर-शेकन मिसाइल से हमला तेज कर दिया है। मिसाइल के हमले में सऊदी अरब जल उठा है। उसके तेल के कई प्लांट को भारी नुक़सान पहुंचा है। सवाल यह है कि चीन की मिसाइल हूती विद्रोहियों तक पहुंची कैसे।
क्या है नया खुलासा?
ब्रिटेन की हथियार ट्रैकिंग एजेंसी Conflict Armament Research (CAR) और Wall Street Journal की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती ईरान की सबसे एडवांस मिसाइल ‘खैबर-शेकन’ का कॉपी वर्जन बना रहे हैं। इसके लिए चीन की प्रिसिजन-मेटल कंपनियों से मोटर, एयरफ्रेम और फिन्स जैसे पार्ट्स मंगाए जा रहे थे। यमन सरकार ने 2025 में दो ऐसी खेप पकड़ी थी जो दूसरे सामान में छिपाकर भेजी जा रही थीं।
सऊदी क्यों टारगेट पर?
इस नई मिसाइल की रेंज 1200 मील यानी करीब 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। इसका मतलब पूरा सऊदी अरब, UAE और इजरायल इसकी जद में है। रिपोर्ट के बाद ही पिछले वीकेंड रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती हमले में 13 लोगों की मौत और एनर्जी फैसिलिटी पर हमलों से सऊदी में हड़कंप मचा है।
चीन का क्या रोल?
UN रिपोर्ट में कहा गया है कि हूतियों के लिए जब्त किए गए सामान का सबसे बड़ा सोर्स अब चीन बन गया है। चीन कह रहा है कि वो मिलिट्री एक्सपोर्ट पर कंट्रोल रखता है, लेकिन जानकारों का कहना है कि हूती कम से कम 2 साल से सॉलिड-फ्यूल मिसाइल के पार्ट्स मंगा रहे हैं।




