132 साल बाद फिर पीने लायक बनेगा पवई तालाब का पानी, BMC का बड़ा प्लान
पवई तालाब के सलाहकार नियुक्त करेगी बीएमसी

इनसाइट न्यूज स्टोरी
मुंबई। इस साल कम बारिश के कारण मुंबई में पानी की कमी ने बीएमसी को नींद से जगा दिया है। बीएमसी अब वर्षों से बेकार पड़े पवई तालाब का पानी अब फिर से पीने लायक बनाने की तैयारी तेज कर दी है। BMC तालाब पुनरुद्धार के लिए सलाहकार नियुक्त करने जा रही है। दिया है। (BMC to Make Powai Lake Water Drinkable Again After 132 Years)
BMC स्थायी समिति में इस आशय का एक प्रस्ताव लाया गया है, उसके अनुसार, तालाब में जाने वाली सभी 18 सीवर लाइनों को मोड़ दिया गया है। पहले बरसात के नाले और कलवर्ट से गंदा पानी सीधा तालाब में जाता था, अब उसे रोक कर STP के जरिए प्रोसेस किया जा रहा है।
32% खत्म हो चुकी है क्षमता
290 हेक्टेयर और 557 एकड़ में फैले इस तालाब की परिधि 10.2 KM है। MERI नाशिक की DGPS बाथिमेट्री रिपोर्ट के अनुसार गाद और कचरे से इसकी क्षमता 5455 मिलियन लीटर से घटकर 3693 मिलियन लीटर रह गई है, यानी 32.30% स्टोरेज खत्म। अभी इसका 90.3 मिलियन लीटर पानी सिर्फ आरे डेयरी और L&T कंपनी के औद्योगिक काम में जाता है।
1893 में ही बंद हो गया था पीने का पानी
इतिहास के अनुसार अंग्रेजों ने 1891 में मीठी नदी की सहायक नदी पर बांध बनाकर ये तालाब बनाया था। शुरुआती लागत 6.50 लाख रुपये आई थी। लेकिन पानी की खराब क्वालिटी के कारण 1893 में ही इसे पीने के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया। 1919 में 5 लाख रुपये और खर्च कर इसे उपनगरों के लिए चालू करने की कोशिश हुई, लेकिन तानसा जलाशय बनने के बाद योजना छोड़ दी गई।
अब क्या हो रहा है और कितना खर्च?
BMC के इस प्रस्ताव में अभी खर्च का कोई आंकड़ा तय नहीं है। ये सिर्फ पुनरुज्जीवन की सैद्धांतिक मंजूरी है।
1. गाद निकालने और निपटारे के लिए ग्रीन यात्रा संस्था को सलाहकार बनाया गया है।
2. जैव विविधता बचाने के लिए BNHS की मदद ली जा रही है।
3. जलकुंभी निकालने के लिए 2 हार्वेस्टर मशीनें लगाई गई हैं, जिसके लिए 8 दिसंबर 2025 को ठेकेदार नियुक्त हो चुका है।
इन कामों के बाद पर्यावरण और वन विभाग के नियमों के अनुसार एक अत्याधुनिक जलशुद्धीकरण केंद्र बनाया जाएगा, तभी इसकी लागत तय होगी और फिर पानी पीने लायक हो सकेगा।




