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BMC प्रदूषण टेंडर 22 महीने की देरी से,11.28 करोड़ का प्रस्ताव स्थायी समिति में।
9000 निर्माण स्थलों पर सेंसर की जांच का टेंडर 22 महीने लेट

इनसाइट न्यूज स्टोरी
मुंबई। मुंबई की हवा सुधारने के नाम पर BMC में बड़ा खेल सामने आया है। जिस काम की अनुमानित लागत विभाग ने खुद 11 करोड़ 90 लाख 26 हजार 940 रुपए (11.90 करोड़) तय की थी, उसी काम के लिए एक कंपनी को 11 करोड़ 28 लाख रुपए देने की तैयारी है।
यह मामला है हवा गुणवत्ता सेंसर (Air Quality Sensor) के डेटा ऑडिट का। शहर में 17 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगे हैं, जिनका डेटा जांचने के लिए हर स्टेशन पर 3 बार ऑडिट करना है। कुल 9000 ऑडिट के लिए पर्यावरण विभाग ने 9 जून 2023 को टेंडर निकाला था। BMC के दस्तावेज (Standing Committee Item No. 12) के मुताबिक दो कंपनियां आईं -M/s महाबल एनवायरो इंजीनियर्स प्रा. लि. – 11,33,69,000 रुपए (अनुमान से 2.90% ज्यादा) M/s अश्वमेध इंजीनियर्स – 11,47,89,000 रुपए (3.38% ज्यादा) विभाग ने महाबल कंपनी को L1 घोषित किया और नेगोशिएशन के बाद 0.49% कम कराकर 11.28,05,439.90 रुपए (11.28 करोड़) पर फाइनल किया। हैरानी की बात है कि विभाग ने 11 करोड़ को ही L1 मान लिया, जबकि उसका अपना अनुमान सिर्फ 11.90 करोड़ था।
सबसे बड़ा सवाल – अगर अनुमान 11.90 करोड़ था तो 11.33 करोड़ को 2.90% ज्यादा कैसे बताया गया? गणित के हिसाब से यह 734% ज्यादा बनता है। दूसरा सवाल, यह टेंडर 9 जून 2023 का है, यानी 22 महीने लेट। 3 साल के लिए काम देना था, अब जब मुंबई की हवा पहले से खराब है तब ऑडिट की फाइल घूम रही है।अब यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए स्थायी समिति के सामने रखा गया है।
मनपा ने कांग्रेस के गुट नेता अशरफ आजमी ने स्थायी समिति में लाए जा रहे इस प्रस्ताव पर तीखा हमला बोला है। आजमी ने विभाग की घोर लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 09 जनवरी 2025 को आदेश दिया था कि सभी निर्माण स्थलों पर सेंसर से निगरानी अनिवार्य की जाए, लेकिन बीएमसी ने टेंडर 17 जुलाई 2026 को निकाला। 22 महीने की देरी ही बताती है कि प्रशासन प्रदूषण को लेकर कितना गंभीर है।




