न्यायालयीन आदेशों के बावजूद लंबित तोड़क कार्रवाई पर उठे सवाल, बीएमसी के चार रजिस्टरों की जांच की मांग
जिम्मेदार बीएमसी अधिकारियों की तय जो जवाबदेही

न्यायालयीन आदेशों के बावजूद लंबित तोड़क कार्रवाई पर उठे सवाल, बीएमसी के चार रजिस्टरों की जांच की मांग
जिम्मेदार अधिकारियों की तय जो जवाबदेही
प्रमुख संवाददाता
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा शहर में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली अनधिकृत संरचनाओं के खिलाफ की जाने वाली तोड़क कार्रवाई एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है। लेकिन अब इसी प्रक्रिया के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई ऐसे मामलों में, जहां न्यायालयीन कार्यवाही और अपील की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, वहां भी संबंधित विभागों ने अब तक अवैध संरचानाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। (BMC Demolition Delay Despite Court Orders, Demand to Probe 4 Registers)
सामाजिक कार्यकर्ता सिद्दीक शेख के अनुसार ऐसे लंबित मामलों की पूरी कुंडली बीएमसी के चार महत्वपूर्ण रजिस्टरों में दर्ज है – डिटेक्शन रजिस्टर, नोटिस रजिस्टर, डिमोलिशन रजिस्टर और कोर्ट इंजेक्शन रजिस्टर। इन रजिस्टरों में यह दर्ज होता है कि किस संरचना को कब अवैध पाया गया, उसे कब नोटिस दिया गया, उस पर तोड़क कार्रवाई हुई या नहीं, और क्या उस पर न्यायालय से कोई स्थगन आदेश है या नहीं।
मनपा की इस कार्यप्रणाली के जानकारों का कहना है कि यदि किसी प्रकरण में न्यायालय ने पहले ही अंतिम आदेश दे दिया है और विभागीय रिकॉर्ड में भी वह अनधिकृत सिद्ध हो चुका है, तो उसके बाद कार्रवाई को लंबित रखने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बचता। ऐसे में यह प्रशासनिक उदासीनता का मामला बन जाता है।
इसको लेकर अब मांग की जा रही है कि संबंधित वॉर्ड के इन चारों रजिस्टरों की स्वतंत्र और विस्तृत जांच कराई जाए। जांच में यह सत्यापित किया जाए कि कितने मामलों में कोर्ट के आदेश के बावजूद फाइलें धूल खा रही हैं और कितने मामलों में नोटिस देकर कार्रवाई को बीच में ही रोक दिया गया।
जिम्मेदार अधिकारियों की तय जो जवाबदेही
मांग में यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में सभी न्यायालयीन उपाय समाप्त हो चुके हैं, उनमें कार्रवाई में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि एक जगह कार्रवाई होती है और दूसरी जगह समान स्थिति वाले मामले में नहीं होती, तो इससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगता है।
नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की लंबित कार्रवाइयों से न केवल अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि बीएमसी की कार्यप्रणाली पर भी जनता का भरोसा कम होता है। इसलिए लंबित प्रकरणों की सूची, उन पर आए न्यायालयीन आदेश और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए या कम से कम सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मांग के बाद बीएमसी प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या इन चारों रजिस्टरों की जांच कर लंबित मामलों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।




