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  • दिवाली के दिन ब्रिटेन को मिला हिंदू प्रधानमंत्री

    दिवाली के दिन ब्रिटेन को मिला हिंदू प्रधानमंत्री

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क
    दिल्ली. भारत पर 200 साल राज करने वाले ब्रिटेन पर एक हिंदू मूल के ऋषि सुनक प्रधानमंत्री (Britain got Hindu Prime Minister on Diwali) बनकर इतिहास रच दिया है. ठीक दिवाली के दिन पेनी मॉर्डंट के दौड़ से हटने की घोषणा के बाद सुनक को कंजरवेटिव पार्टी का निर्विरोध नेता चुन लिया गया. 42 वर्षीय पूर्व वित्त मंत्री को कंजरवेटिव पार्टी के 357 में से आधे से अधिक सांसदों का समर्थन मिला जबकि उन्हें जीत के लिए कम से कम 100 सांसदों के समर्थन की जरूरत थी. सांसदों की प्रभावशाली समिति 1922 के प्रमुख सर ग्राहम ब्रैडी ने नाम वापस लेने के आखिरी दिन स्थानीय समयानुसार दो बजे संसद परिसर में घोषणा की कि उन्हें केवल एक नामांकन मिला है, जिसके बाद ॠषि सुनक नेता बनने की दौड़ में विजयी रहे हैं. सुनक का जन्म ब्रिटेन में हुआ था. भारतीय मूल के उनके पिता यशवीर सेवानिवृत्त डॉक्टर हैं जबकि मां ऊषा सुनक फार्मासिस्ट हैं.
        सुनक के पीएम बनते ही भारतीय नेताओं के रिएक्शन भी आने लगे हैं. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्वीट किया, “पहले कमला हैरिस, अब ऋषि सुनक, अमेरिका और ब्रिटेन के लोगों ने अपने देशों के गैर-बहुसंख्यक नागरिकों को गले लगाया है और उन्हें सरकार में उच्च पद के लिए चुना है. मुझे लगता है कि यह भारत और बहुसंख्यकवाद को फॉलो करने वाली पार्टियों के लिए यह सबक सीखना चाहिए.

    परिणाम घोषित होने से पहले, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट किया, “अगर ऐसा होता है, तो मुझे लगता है कि हम सभी को यह स्वीकार करना होगा कि ब्रितानियों ने सबसे ताकतवर ऑफिस में एक अल्पसंख्यक सदस्य को रखकर दुनिया में कुछ बहुत ही दुर्लभ काम किया है. जैसा कि हम भारतीय ऋषि सुनक की सफलता का जश्न मना रहे हैं, आइए ईमानदारी से पूछें: क्या यह यहां (भारत) हो सकता है?

    सुनक को बधाई देते हुए, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि “इतिहास अपने आप को दोहराता है. उन्होंने लिखा, “आज, जब भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने 75वें वर्ष में दिवाली मना रहा है, यूके को भारतीय मूल का प्रधानमंत्री मिला है. इतिहास खुद को दोहराता है. बधाई हो, ॠषि सुनक, हैप्पी दिवाली.

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रवक्ता प्रीति गांधी ने ट्वीट किया, तो इसकी पुष्टि हो गई है. दिवाली के दिन, ॠषि सुनक ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के हिंदू प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रच दिया है. किसने सोचा होगा कि महज 75 साल में पासा पलट जाएगा. दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने भी सुनक को बधाई दी. उन्होंने लिखा, “एक ऐतिहासिक दिन! ग्रेट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने जाने पर RishiSunak को बधाई. ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के पीएम बने. दुनिया भर में भारतीय मूल के लोगों को आप पर गर्व है.

     

  • जब मुंबई दौरे पर आई लिज़ ट्रस,एक साल बाद बनी ब्रिटेन की प्रधानमंत्री

    जब मुंबई दौरे पर आई लिज़ ट्रस,एक साल बाद बनी ब्रिटेन की प्रधानमंत्री

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. ब्रिटेन की विदेश सचिव रही लिज़ ट्रस ((Liz Truss) प्रधानमंत्री बनेंगी. उन्होंने भारतीय मूल के पूर्व चांसलर ॠषि सुनक को हरा दिया. लिज़ ट्रस पिछले साल मुंबई महानगरपालिका में ब्रिटिश काल में बनी इमारत में चल रहे मनपा का कामकाज देखने आई थीं. लेकिन तब किसी को नहीं पता था कि वे ब्रिटेन की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवार भी होंगी.

    बोरिस जॉनसन के इस्तीफे के बाद ऋषि सुनक और लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनने की होड़ में थे. लिज़ को 81,326 वोट और सुनक को 60, 399 वोट मिले. थेरेसा में और मार्गरेट थैचर के बाद लिज ट्रस ब्रिटेन की तीसरी महिला प्रधानमंत्री बनी हैं. हालांकि जिस तरह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद के लिए एक भारतीय मूल के व्यक्ति ने चुनौती दी वह काबिले तारीफ थी. ॠषि सुनक की हार का एक प्रमुख कारण उनका हिंदू धर्म में विश्वास और भारतीय होना रहा.

    सुनक मूल रूप से इंग्लैंड या  ब्रिटेन के नहीं है. वोटिंग का जिम्मा कंजर्वेटिव पार्टी के दो लाख कार्यकर्ताओं के पास आने के बाद सुनक सभी सर्वे में ट्रस से पिछड़ते चले गए.

    सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति मशहूर कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी हैं. अक्षता भारत में पैदा हुई हैं. विपक्ष ने अक्षता को उनकी ‘गैर-स्थानीय कर स्थिति’ को लेकर निशाना बनाया. अक्षता की इंफोसिस में लगभग 0.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ‘गैर-स्थानीय कर स्थिति’ का अर्थ है कि वह विदेशों में अर्जित आमदनी पर ब्रिटेन में कर देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं.

    टैक्स कम करने के भी सुनक एकदम खिलाफ थे और लिज ट्रस ने इसके ठीक उलट कहा कि मैं आते ही टैक्स को कम कर दूंगी. इसके अलावा सुनक पर प्रवासी होने का ठप्पा भी लगातार बना रहा था. एक साल पहले तक ऋषि सुनक अगले टोरी नेता बनने की रेस में सबसे आगे थे. सुनक बोरिस जॉनसन के खिलाफ चले गए. अपनी जीत के बाद लिज ट्रस बोरिस जॉनसन को थैक्यू कर रही थी. ट्रस पहले से ही जॉनसन कैंप की मानी जा रही थी. पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने भी ॠषि सुनक की जगह लिज ट्रस को ही वोट दिया.