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  • लाड़ली बहन योजना, मुफ्त की रेवड़ी पर लगेगा ब्रेक?

    लाड़ली बहन योजना, मुफ्त की रेवड़ी पर लगेगा ब्रेक?

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क
    मुंबई. विधानसभा चुनाव से पूर्व राज्य सरकार द्वारा लाई गई ‘लाड़ली बहन योजना’ (Ladli Bahan Yojna) के तहत करदाताओं के पैसे को मुफ्त में बांटने के उद्देश्य पर रोक लग सकती है. इस योजना के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. मंगलवार को चीफ जस्टिस की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. (Ladli Behan Yojana, will there be a ban on freebies)
    अधिवक्ता ओवैस पेचकर और चार्टर्ड एकाउंटेंट नाविद मुल्ला की तरफ से यह याचिका दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि हम सरकार की कल्याणकारी योजना के लिए टैक्स भरते हैं. पैसे का दुरुपयोग करने के लिए टैक्स नहीं भरते हैं.  हाईकोर्ट से 14 अगस्त से पहले याचिका पर निर्णय लेकर लाड़ली बहन योजना पर रोक लगाने की मांग की गई है.
    याचिका में कहा गया है कि जिस तरह मतदान के समय मतदाताओं को पैसे बांटा जाता है. उसी तरह सरकार बड़े पेैमाने पर मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त की रेवडी देकर वोट लेने का यह प्रयास किया जा रहा है. याचिका में कहा गया है कि लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को हुए नुकसान के कारण विधानसभा चुनाव में जीत के लिए यह योजना लाई गई है. वर्तमान सरकार डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास कर रही है.
    योजना के कारण राज्य पर हजारों करोड़ का भार पड़ेगा. इसी तरह “लाड़ला भाई योजना” के लिए 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. इसलिए दोनों योजनाओं पर रोक लगाई जानी चाहिए. सरकार करदाताओं द्वारा  दिए गए पैसे के बल पर अपना फायदा कर रही है. यह मतदाताओं के साथ विश्वासघात है.
    याचिका में मुख्यमंत्री, वित्त विभाग, महिला बाल व कल्याण विभाग, कौशल विकास विभाग को पार्टी बनाया गया है.  ज्ञात हो कि लाड़ली बहन योजना के तहत रक्षा बंधन से पूर्व महिलाओं के खाते में पैसा जमा किए जाने की तैयारी की जा रही है. महाराष्ट्र की सरकार लाड़ली बहन योजना के तहत राज्य की महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपया देने वाली है. इस योजना पर 46000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. योजना का लाभ 21 से 60 वर्ष आयु की महिलाओं को मिलेगा.
  • हाईकोर्ट में राज्य चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष,  हम कानून से बंधे हैं

    हाईकोर्ट में राज्य चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष, हम कानून से बंधे हैं

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. राज्य सरकार द्वारा मुंबई मनपा वार्डों की संख्या घटाने के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट में तीन दिन से चल रही बहस आज जस्टिस सुनील शुक्रे और जस्टिस एम डब्ल्यू चांदवानी की बेंच में पूरी हो गई. बहस पूरी होने के साथ हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर दिया. चुनाव आयोग ने आज हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा. आयोग ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पारित किसी भी कानून का पालन करने के लिए हम बंधे रहते हैं. हमारी भूमिका कानून या अध्यादेश पालन तक ही सीमित है. (The State Election Commission presented its stand in the High Court, we are bound by the law)

    याचिका की सुनवाई सोमवार से शुरू हुई थी जो तीसरे दिन पूरी हुई  आज मुंबई हाईकोर्ट के सामने राज्य चुनाव आयोग ने अपना पक्ष स्पष्ट किया  राज्य चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील शचींद्र शेट्ये ने कहा कि  महाविकास आघाड़ी सरकार हो या शिंदे फडणवीस सरकार किसी भी अधिसूचना और कानून का पालन करने हम बाध्य होते हैं.

    चुनाव आयोग के अधिवक्ता सचिंद्र शेट्ये ने हाईकोर्ट  को बताया कि महाविकास आघाड़ी सरकार ने वार्डों की संख्या बढ़ाने के संबंध में अधिसूचना जारी की थी.  हम उसी के अनुसार के अनुसार चुनाव प्रक्रिया शुरू किए थे. किसी भी चुनाव के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरा करने में कम से कम छह महीने का समय लगता हैं.

    मार्च 2022 में समाप्त होने वाले मनपा कार्यकाल से 6 महीना पूर्व चुनाव आयोग  चुनाव प्रक्रिया शुरू करने जा रही थी. लेकिन जनवरी 2022 में विधानमंडल ने वार्डों की संख्या को 227 से बढ़ाकर 236 करने का कानून लेकर आ गया. अधिसूचना जारी कर दी गई.  मई 2022 में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने 236 निर्वाचन क्षेत्रों के साथ चुनाव की तैयारी की शुरू किया और उस संबंध में एक अंतिम अधिसूचना जारी की. 9 सीटों को बढ़ाने के लिए वार्डों का सीमांकन किया गया. जनता से सजेशन ऑब्जेक्शन मंगाए जिसमें 5000 आपत्तियां प्राप्त हुईं. उस पर भी व्यक्तिगत सुनवाई कर आपत्तियों का निस्तारण किया गया.

    सितंबर 2022 में  राज्य में स्थापित नई सरकार ने वार्डों की संख्या बढ़ाकर 227 करने के लिए एक और कानून पेश किया. नए कानून के बाद हमें फिर से उसी हिसाब से काम करना शुरू किया.

    मामले में  राज्य सरकार के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने कहा कि एसईसी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार चुनाव कराने की कोशिश कर रहा है. सराफ ने स्पष्ट किया कि महाविकास आघाड़ी सरकार के फैसले के अनुसार सीमांकन का काम पूरा होने की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी. सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के अनुसार चुनाव की प्रक्रिया दुबारा शुरू की गई.

  • सिद्ध करें जबरन कोविड टीका जनहित में है

    सिद्ध करें जबरन कोविड टीका जनहित में है

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क
    मुंबई. मुंबई हाईकोर्ट ने बुधवार को  (Mumbai Highcourt On Vaccination ) राज्य सरकार के जबरन कोविड लगाने के अभियान पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि सिद्ध करें की टीका जनहित में  High Court Ask State Government  Prove that vaccination is in the public interest) है. इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि नियमानुसार अनिवार्य रूप से टीका लगाने के संदर्भ में निर्णय के लिएसरकार ने बैठक ली थी लेकिन बैठक की नोटिंग नहीं की गई. हाईकोर्ट ने पूछा कि जबरन वैक्सीन लगाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया है.  सरकार के इस निर्णय के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता फिरोज मिठबोरवाला ने क्रिमिनल पीटीशन दायर की थी जिसकी सुनवाई चल रही है. लोकल ट्रेन में डबल वैक्सीनेशन को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी.
    राज्य सरकार की तरफ से कहा गया था कि टीका लगाने का निर्णय जनहित में है. उसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता. यह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार है. लोकर में यात्रा के लिए वैक्सीनेशन जनहितैषी है यह सिद्ध करने का आदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता  और जस्टिस एम एस कर्णिक की बेंच ने दिया है.
    सरकार नेइससे पहले अपने जवाब में कहा था कि यह बहस गलत है कि टीकाकरण से संक्रमण नहीं रुकता है. टीकाकरण के बाद भी कुछ लोग संक्रमित हुए हैं. वैक्सीनेशन के बाद अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है. ऑक्सीजन के कारण लोगों की मृत्यु न हो यह हमारा प्रयास है. हाईकोर्ट ने पूछा कि सर्कुलर निकालते हुए सरकार ने किन विषयों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया था इसका हमें उत्तर दीजिए.