सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर पर लगाया 5 लाख जुर्माना, सैलरी भी रोकी, जेल भेजने की चेतावनी
41 साल पुराने मामले में अवमानना का नोटिस

इनसाइट न्यूज स्टोरी
दिल्ली। 41 साल पुराने एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीएमसी कमिश्नर पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया। एक दिसंबर सैलरी भी रोक दी और जेल भेजने की सख़्त चेतावनी भी दी है। इससे मनपा अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। कोर्ट ने आयुक्त पर अवमानना का नोटिस भी जारी किया है। (BMC Commissioner Salary Stopped: Supreme Court on BEST Land )
बीएमसी के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर और उनके स्टाफ की सैलरी पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने मंगलवार को कहा- “आप 1 दिसंबर तक सैलरी नहीं लेंगे, पहले कोर्ट का आदेश मानिए।”
मुंबई के बोरीवली में BEST के एक बस स्टैंड के लिए 3400 स्क्वेयर मीटर जमीन रिजर्व थी। नियम के मुताबिक बीएमसी ने एक प्राइवेट डेवलपर से एग्रीमेंट किया था। डेवलपर को 70 फीसदी जमीन पर कमर्शियल टावर बनाने दिया जाना था, बदले में उसे बस स्टैंड और 200 स्क्वेयर मीटर का एडमिन ब्लॉक बनाकर बीएमसी को सौंपना था।
डेवलपर ने टावर तो बना लिया, लेकिन बस स्टैंड वाली जमीन खाली नहीं की। वहां कंस्ट्रक्शन मटेरियल और अतिक्रमण बना रहा। सालों तक मामला लटका रहा।
13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश दिया था कि डेवलपर 8 हफ्ते में खाली पजेशन दे, बीएमसी 3 महीने में बस स्टैंड चालू करे और अतिक्रमण हटाए। लेकिन कुछ नहीं हुआ।
कोर्ट में बीएमसी का अजीब बहाना
13 नवंबर 2025 को कोर्ट ने फिर पूछा तो कमिश्नर ने समय मांगा। आज 3 नवंबर 2026 को फिर समय मांगा गया और एफिडेविट में लिखा- “अधिकारियों को मराठी दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद करना है।”
इस पर CJI भड़क गए। उन्होंने कहा- “एफिडेविट डॉ. तांबे नाम के अधिकारी ने दिया है, क्या हमें मानना चाहिए कि उसे मराठी नहीं आती? यह अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत है। हम जेल भेज देंगे, तब सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहमियत समझ आएगी।”
बेंच ने इसे ‘जानबूझकर किया गया शरारतपूर्ण उल्लंघन’ बताते हुए कहा कि अब कमिश्नर को 1 दिसंबर से पहले जमीन खाली कराकर जवाब देना होगा, वरना अवमानना की कार्रवाई होगी।




