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  • उद्धव ठाकरे नहीं कर पा रहे पार्टी के भीतर डैमेज कंट्रोल,  शिवसेना यूबीटी के सोशल मीडिया प्रमुख ने थामा शिंदे का हाथ

    उद्धव ठाकरे नहीं कर पा रहे पार्टी के भीतर डैमेज कंट्रोल, शिवसेना यूबीटी के सोशल मीडिया प्रमुख ने थामा शिंदे का हाथ

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. शिवसेना (ShivSena) में विभाजन के बाद से ठाकरे परिवार का पार्टी पर पकड़ ढ़ीली पड़ती जा रही है. शुरुआती झटकों से उबरने के बाद उद्धव ठाकरे ने भावनात्मक मुद्दे उपस्थित कर पार्टी में हो रहे डैमेज कंट्रोल रोकने को रोकने की कोशिश की लेकिन उन्हें उतनी सफलता मिलती नहीं दिख रही है.(Uddhav Thackeray is unable to do damage control within the party, Shiv Sena UBT’s social media joine Shivsena)
    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे लगातार उद्धव ठाकरे के करीबी कार्यकर्ताओं को तोड़ने में कामयाब हो रहे हैं. ठाकरे परिवार को अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ना पड़ रहा है. अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे ठाकरे गुट को एक और झटका लगा है. अभी तक पूरे राज्य में शिंदे गुट की शिवसेना द्वारा ठाकरे गुट के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और महत्वपूर्ण नेताओं को अपने पाले में किया जा रहा है. एकनाथ शिंदे ने अब से सीधे शिवसेना भवन में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है.  ठाकरे गुट की सभाओं, कार्यक्रमों और सोशल मीडिया अभियानों को संभालने वाली शिवसेना भवन की टीम को ही शिंदे ने तोड़ लिया है.
         शिवसेना भवन के ये कर्मचारी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में चांदीवली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उद्धव गुट को छोड़ शिवसेना में शामिल हो गए. इसमें अमोल मटकर, (Amol Matkar) अमित शिवगण, अविनाश मालप, प्रथमेश चाचले शामिल हैं.  ठाकरे परिवार के करीबी और सचिव अनिल देसाई के विश्वासपात्र के रूप में पहचाने जाने वाले अमोल मटकर शिंदे समूह में आ गए हैं, जो ठाकरे के लिए एक झटका माना जा रहा है.
      अमोल मटकर पार्टी में एक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे, जिन्होंने शिवसेना के आयोजनों, सोशल मीडिया और डिजाइनिंग टीम में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हर साल, दशहरा मेला, पार्टी और मार्मिक की सालगिरह और पूरे कार्यक्रम को मंच की पृष्ठभूमि से आयोजित करने के लिए अमोल पर जिम्मेदारी होती थी. साथ ही सोशल मीडिया पर पोस्टर, बैनर और मीम्स, कार्ड, फोटो और वीडियो डिजाइनिंग के काम में अहम भूमिका निभाते थे.
        2012 के मुंबई मनपा चुनाव का प्रसिद्ध नारा है ‘हाँ, मैने करके दिखाया!’ इस कैंपेन में अमोल ने अहम भूमिका निभाई थी. इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना-भाजपा गठबंधन सरकार में परिवहन मंत्री दिवाकर रावते के नेतृत्व में पूरे महाराष्ट्र में पहुंचने वाली सभी नई शिवशाही एसटी बसों पर लोगो भी डिजाइन किया. इस वर्ष, स्वतंत्रता अमृत महोत्सव का मराठी लोगो भी अमोल का अपना काम है, जिसे छाता डिजाइन की अवधारणा से बनाया गया है. इसलिए शिवसेना में चर्चा है कि ठाकरे गुट ने पार्टी का एक अहम स्तंभ खो दिया है. अब देखना यह होगा कि ठाकरे गुट डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कदम उठाता है.
    शिंदे गुट के नेता मुंबई में सक्रिय हो गए हैं. अब तक शिवसेना यूबीटी के 15 नगरसेवक शिवसेना में शामिल हो चुके हैं. शीतल म्हात्रे ने का कि अभी तो शुरुआत हुई है. 35 और पूर्व नगरसेवक लाइन में हैं. लेकिन हम एकसाथ शॉक देना नहीं चाहते इसलिए  गर्म दूध को ठंडा कर काम किया जा रहा है. आने वाले मनपा चुनाव में जहां भाजपा से सीटों पर की मांग को लेकर शिवसेना का दबदबा बढ़ेगा, वहीं महाविकास आघाड़ी दलों खासकर कांग्रेस के सामने शिवसेना की स्थिति कमजोर होगी.
  • शिवसेना ठाकरे गुट के महाराष्ट्र संगठक, बड़े उत्तर भारतीय नेता कमलेश राय ने भी छोड़ा ठाकरे का साथ मुंबई में ठाकरे गुट को एक और झटका 

    शिवसेना ठाकरे गुट के महाराष्ट्र संगठक, बड़े उत्तर भारतीय नेता कमलेश राय ने भी छोड़ा ठाकरे का साथ मुंबई में ठाकरे गुट को एक और झटका 

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुबई. शिवसेना (ShivSena) में बगावत के बाद से उद्धव ठाकरे को मुंबई ही नहीं महाराष्ट्र में कई झटके लगे थे. 40 विधायक 13 सांसद ठाकरे का साथ छोड़ कर शिंदे के साथ चले गए थे. अब शिवसेना का गढ़ कहे जाने वाले मुंबई में भी शिंदे गुट मजबूत होता जा रहा है.(Shiv Sena’s strong North Indian leader Kamlesh Rai also left Thackeray’s sidel)

    शिवसेना के 84 पूर्व नगरसेवक में से 4 शिंदे के साथ चले गए थे. लेकिन धीरे-धीरे अब मुझे के नगरसेवक भी ठाकरे का साथ छोड़ रहे हैं. अब शिवसेना महाराष्ट्र के संगठक पद पर कार्यरत कद्दावर उत्तर भारतीय नेता कमलेश राय ठाकरे का साथ छोड़ कर शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. इससे मुंबई में शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है.
    मुंबई में भी शिंदे ने लगाई सेंध
    ठाणे जिले में ठाकरे गुट का सफाया करने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अब मुंबई के पूर्व नगरसेवकों और पदाधिकारियों को अपने पाले में लाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं. इससे पहले शिवसेना ठाकरे गुट के नगरसेवक परमेश्वर कदम शिंदे गुट में शामिल हो गए थे. शिवसेना ठाकरे गुट के मजबूत उत्तर भारतीय नेता ने कमलेश राय भी ठाकरे का साथ छोड़ कर शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. 26 मार्च को अंधेरी पूर्व मरोल रामलीला मैदान में शाम 6.30 बजे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सभा का आयोजन किया गया है. जिसमें शिवसेना के अन्य उत्तर भारतीय पदाधिकारी शिवसेना में शिंदे गुट शामिल होंगे.
      कमलेश राय ने लगाया गंभीर आरोप
    शिवसेना महाराष्ट्र संगठक कमलेश राय ने आरोप लगाया कि ढ़ाई वर्ष आघाड़ी सरकार रहते हुए उत्तर भारतीय का कोई काम नहीं किया गया. ट्रैफिक पुलिस रोज ऑटो रिक्शा चालकों को फाइन मारकर परेशान करती है. हमने अनिल परब को बार बार इस क्षेत्र की समस्याओं का निदान करने के लिए कहा लेकिन उन्होंने कोई भी काम नहीं किया. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सभी समस्याओं का निराकरण करने का आश्वासन दिया है.
     इन समस्याओं से जूझ रहे स्थानीय नागरिक
    कमलेश राय ने कहा कि ऑटो चालकों के अलावा सबसे बड़ी समस्या एसआरए परियोजनाओं में लोगों के पास कागजात रहते हुए अपात्र किया जा रहा है. सहार एयरपोर्ट कार्गो में स्थानीय टेम्पो वाहनों को फ्री पास मिलना चाहिए. एयरपोर्ट में स्थानीय युवकों को जॉब में वरीयता देने जैसी हमारी मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री और अनिल परब ने ध्यान ही नहीं दिया.
        शिंदे एक्टिव करेंगे सभी काम
    कमलेश राय पूर्व नगरसेवक रह चुके हैं. उनकी पत्नी भी निवर्तमान नगरसेविका थीं. राय की अंधेरी में अच्छी पकड़ है. अभी हुए उपचुनाव में वे भी शिवसेना उम्मीदवार के लिए बड़े दावेदार थे. फिलहाल वे उद्धव ठाकरे गुट का साथ छोड़ शिवसेना पार्टी के साथ चले गए थे. कमलेश राय के जाने से उतर भारतीय वोट उद्धव गुट का साथ छोड़ सकता है.
     26 मार्च को कमलेश राय का शक्ति प्रदर्शन
    मुख्यमंत्री की सभा में उत्तर भारतीय नेता कमलेश राय शक्ति प्रदर्शन करेंगे.  इस कार्यक्रम में भोजपुरी के सुपर स्टार गायक मोहन राठोर और समर सिंह को बुलाया गया है जो अपनी परफॉर्मेंस देंगे. इस आयोजन में स्थानीय शिवसेना सांसद गजानन कीर्ति कर सहित शिवसेना के सभी बड़े नेता उपस्थित रहेंगे.
  • महाराष्ट्र द्रोह का जवाब राष्ट्रद्रोह से, तमतमाया विपक्ष, सीएम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी

    महाराष्ट्र द्रोह का जवाब राष्ट्रद्रोह से, तमतमाया विपक्ष, सीएम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ( No confidence Motion Against CM) को महाराष्ट्र द्रोही बताने पर उन्होंने विपक्षी दलों को राष्ट्रद्रोही बता दिया था जिसके बाद विपक्ष तमतमाया हुआ है. अब विपक्ष मुख्यमंत्री के खिलाफ विधान परिषद में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता अंबादास दानवे ने इसके संकेत दिए हैं.(opposition preparing to bring no-confidence motion against CM)

    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तरफ से बुलाए गए सरकारी चायपान का बहिष्कार करने पर प्रतिक्रिया में विपक्ष ने कहा था कि महाराष्ट्र द्रोही की चाय नहीं पी सकते. जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा था कि अच्छा हुआ राष्ट्रद्रोहियों के साथ पीने की नौबत नहीं आई.

    बजट सत्र के पहले ही दिन ठाकरे गुट के नेताओं ने शिवसेना के चीफ व्हिप की परवाह के बिना मुख्यमंत्री के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार किया हुआ है. विधान परिषद में विपक्ष बहुमत में है.  मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से सरकार की किरकिरी हो सकती है. मंगलवार को सुबह ठाकरे गुट के विधायकों की बैठक होनी है. जिसमें सरकार को मजबूर करने की रणनीति बन सकती है.

    गौरतलब हो कि रविवार को विपक्ष ने सरकारी चाय पान के कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए कहा था कि यह सरकार संविधान के खिलाफ है.  भाजपा और खोखा नेताओं ने महाराष्ट्र द्रोह कर राज्य में बनाई है इसलिए सरकार का चाय नहीं पी सकते हैं. जिस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कहा था कि अच्छा हुआ कि हमें राष्ट्रद्रोहियों के साथ चाय नहीं पीनी पड़ी. सीएम शिंदे के इसी बयान को ठाकरे गुट ने मुद्दा बना लिया है. सोमवार को इस मुद्दे पर खूब हंगामा हुआ. मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर विपक्ष यह बताने का प्रयास करेगा कि विपक्ष को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

     

  • मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में मिलिंद नार्वेकर

    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में मिलिंद नार्वेकर

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निकट सहयोगी मिलिंद नार्वेकर  (Milind Narvekar) मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं. नार्वेकर जल्द ही विधान मंडल के सदस्य भी बन सकते हैं. इस तरह का दावा शिंदे गुट के विधायक संजय शिरसाट (Sanjay Shisat) ने किया है. (Milind Narvekar in contact with Chief Minister Eknath Shinde)

    नार्वेकर विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. लेकिन बजट सत्र के पहले दिन मिलिंद नार्वेकर विधान मंडल के सभागृह में बैठे दिखे. नार्वेकर की गलती का एहसास युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने करवाया. उसके बाद वे अपनी गलती स्वीकार कर बाहर निकल गए. लेकिन इस घटना के बाद चर्चाओं का बाजार गरम हो गया है.

    बजट सत्र के पहले दिन संयुक्त सभागृह में राज्यपाल ने अभिभाषण दिया इसके पहले मिलिंद नार्वेकर संयुक्त सभागृह में पहुंच गए. उन्हें सभागृह बैठा देख कर  आदित्य ठाकरे को उनकी गलती का एहसास हुआ और नार्वेकर सभागृह से बाहर निकल गए. नार्वेकर ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गलती से सभागृह को प्रेक्षक गैलरी समझ गए थे. लेकिन सवाल उठाया जा रहा है कि उन्हें सुरक्षा रक्षकों ने क्यों नहीं रोका.
     “नार्वेकर की बहुत दिनों से विधायक बनने की इच्छा है. लेकिन उद्धव ठाकरे ने इस इच्छा को पूरा नहीं किया. उनके सभी राजनीतिक पार्टियों से अच्छे संबंध हैं. सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद स्थित स्पष्ट होगी.”
     संजय शिरसाट
     विधायक ,शिवसेना
  • ठाकरे नहीं बनना चाहते थे सीएम, राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का खुलासा

    ठाकरे नहीं बनना चाहते थे सीएम, राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का खुलासा

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. पिछले चार वर्षों में महाराष्ट्र (Maharashtra politics) की अस्थिर राजनीति पूरे देश में चर्चा का विषय रही है. शिवसेना प्रमुख पद पर रहते हुए स्व. बालासाहेब ठाकरे ने दो मुख्यमंत्री बनाए लेकिन रिमोट अपने हाथ में रखते थे. लेकिन अब पार्टी में बगावत के बाद ठाकरे परिवार ( Family’ of Bal Thackeray) के हाथ से पार्टी का नाम और सिंबल ( Name and Symbol) दोनों छिन जाने के बाद राकां के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने बड़ा खुलासा किया है. यह खुलासा महाविकास आघाड़ी सरकार  (MahaVikas Aghadi) के गठन के समय का है. (Thackeray did not want to become CM, reveals senior Nationalist Congress leader)

    छगन भुजबल (Chagan Bhujbal) ने खुलासा किया है कि शुरुआत में ही उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने एकनाथ शिंदे  (Eknath Shinde) का नाम मुख्यमंत्री पद ( CM Post) के लिए सुझाया था  लेकिन उद्धव ठाकरे को सीनियर के रूप में आगे किया गया था. उन्होंने कहा कि पवार साहेब(Sharad Pawar)  ने शिंदे की जगह उद्धव को मुख्यमंत्री बनाने पर जोर दिया था. इसकी वजह उनका सीनियर होना था.

    भुजबल ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और सुभाष देसाई ( Subhash Desai) जैसे कुछ नाम आगे रखे थे. लेकिन शरद पवार ने उद्धव ठाकरे के नाम पर जोर दिया. भुजबल ने कहा कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद के लिए इसलिए दबाव बनाया गया क्योंकि कांग्रेस (Congress) और राकांपा (NCP) के कई विधायक  जो मंत्री बनेंगे, वे वरिष्ठ हैं.

    बगावत के बाद शिंदे गुट (Shinde faction) और भाजपा के नेता आरोप लगा रहे थे कि पवार साहब की इच्छापूर्ति के लिए उद्धव ठाकरे ने पार्टी का ही गला घोंट दिया. ठाकरे ने हिंदुत्व छोड़ दिया. अब उद्धव ठाकरे को हिंदुत्व नहीं छोड़ने पर सफाई देनी पड़ रही है. मुख्यमंत्री बनने की इच्छा उद्धव ठाकरे की पूरी हो गई. एकनाथ शिंदे भी मुख्यमंत्री बन गए लेकिन अपने खून पसीने से शिवसेना (ShivSena) को बनाने वाले शिवसैनिक दो राहे पर खड़े हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि कहां जाएं.

  • शिवसेना संघर्ष: तेजी से बदला घटनाक्रम,  शिंदे गुट का सुप्रीम कोर्ट में कैविएट,

    शिवसेना संघर्ष: तेजी से बदला घटनाक्रम, शिंदे गुट का सुप्रीम कोर्ट में कैविएट,

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. शिवसेना के दोनों गुटों में मचे घमासान के बीच शनिवार को राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी से बदलाव देखने को मिला. (Shiv Sena struggle: rapid turn of events, Shinde faction’s caveat in Supreme Court) शुक्रवार को केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह धनुष बाण पर शिंदे गुट के पक्ष में निर्णय दिया था. लेकिन शुक्रवार से लेकर शनिवार के बीच दिन भर दोनों गुटों के जबरदस्त हलचल रही. उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की, वहीं शिंदे गुट की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दिया गया. शिंदे गुट ने कहा कि बिना उनका पक्ष सुने सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर कोई फैसला न सुनाए.

    शनिवार को आई चौंकाने वाली जानकारी 

    लेकिन शनिवार को इससे भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई. शिंदे गुट राज्य भर की सभी शिवसेना शाखाओं पर कब्जा करने की तैयारी कर रही थी. शिंदे गुट के विधायक संजय सिरसाट ने कहा कि वे शिवसेना भवन छोड़ कर सभी पर दावा ठोकेंगे. यहां तक की पार्टी के बैंक खातों को भी लेने दावा किया गया. अब खबर आ रही है कि पार्टी के बैंक खातों में रखे गए करोड़ों रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए गए हैं. दोनों गुटों में शह मात देने की कवायद चल रही है.

    बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने का आशंका 

    दरअसल चुनाव आयोग के फैसले के बाद उद्धव गुट को यह अंदेशा हो गया था कि शिंदे गुट बैंक खातों में पड़े रुपए पर भी अपना दावा कर सकता है. इसलिए बैंक खातों में रखे गए करोड़ों रुपए किसी दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर लिए गए. हालांकि यह जानकारी नहीं मिल सकी की खाते से कितनी बड़ी रकम ट्रांसफर की गई है.

    युवा सेना पर भी कब्जा की रणनीति

    शिंदे गुट पार्टी के बचे हुए सांसद – विधायक के साथ ही पदाधिकारियों पर भी दावा करने जा रहा है. उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे युवा सेना के प्रमुख हैं. शिवसेना युवा युवती सेना पर कब्जा करने से पहले शिंदे गुट ने पदाधिकारियों  की कार्यकारिणी घोषित कर दी. जिसमें डॉ.प्रियंका पाटील, पूजा टांकसालकर, प्रज्ञा बनसोडे, स्नेहल कांबले, शर्मिला येवले, शर्वरी गावंडे, क्षितिजा कांबले, पूजा लोंढे, श्वेता म्हात्रे, शिवानी खानविलकर इन 10 पदाधिकारियों को कार्यकारिणी में शामिल किया गया है. इससे आदित्य ठाकरे का टेंशन बढ़ सकता है.

     

     

  • महाराष्ट्र की सबसे बड़ी खबर, शिंदे गुट को  मिला पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह

    महाराष्ट्र की सबसे बड़ी खबर, शिंदे गुट को मिला पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह

    आईएनएस न्यूज़ नेटवर्क
    मुंबई. महाराष्ट्र में चल रहे सत्ता संघर्ष में आज एक नया मोड़ आ गया. शिवसेना (ShivSena) के चुनाव चिन्ह धनुष बाण को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग में चल रही लड़ाई आखिरकार बालासाहब की शिवसेना ने जीत ली है. केंद्रीय चुनाव आयोग ने आज ‘शिवसेना’ पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह ‘धनुष बाण’ को एकनाथ शिंदे गुट के पक्ष में फैसला सुनाया है.
     शिवसेना पार्टी में विभाजन के बाद बीते 7 महीने से चल रही दोनों गुटों की लड़ाई में यह सबसे अहम मोड़ साबित हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के साथ केंद्रीय चुनाव आयोग में भी चुनाव चिन्ह को लेकर दोनों धड़ों के बीच लड़ाई चल रही थी. उस मामले में आज केंद्रीय चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुनाया. आयोग ने अपने फैसले में कहा कि धनुष बाण पर एकनाथ शिंदे गुट का ही अधिकार है. चुनाव चिन्ह धनुष बाण मिलने पर जहां एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं में भारी उत्साह और खुशी की लहर है, वहीं शिवसेना उद्धव गुट का खेमा बहुत निराश है, शिवसेना एसयूबीटी के प्रवक्ता संजय राऊत ने कहा कि फिलहाल यह लड़ाई अभी भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है. हम केंद्रीय चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.
  • बाला साहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक का 65 प्रतिशत काम पूरा

    बाला साहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक का 65 प्रतिशत काम पूरा

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    मुंबई. दादर स्थित मेयर बंगले में निर्माणाधीन स्व. बाला साहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक (Bala Saheb Thackeray National Memorial) का 65 प्रतिशत काम पूरा हो गया है. मेयर बंगले में पुराने पेड़ों को संरक्षित करने के लिए डिजाइन में मामूली बदलाव किया गया है. स्मारक का काम कर रहे एमएमआरडीए ( MMRDA) ने यह जानकारी दी. (65 percent work of Balasaheb Thackeray National Memorial completed)

    मेयर बंगले की हेरिटेज संरचना बरकरार 

    बालासाहेब ठाकरे स्मारक विरासत और पवित्रता को संरक्षित करते हुए पुराने मेयर के बंगले में बनाया जा रहा एक नया संग्रहालय है. स्मारक में प्रमुख टिकाऊ और ऊर्जा कुशल संरचनाएं शामिल हैं.  प्रवेश भवन का निर्माण, प्रशासन भवन, चरण -1 के तहत टैंक निर्माण और महापौर के निवास भवन की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करके और आसपास के क्षेत्र को सुशोभित करके भवन को संग्रहालय में परिवर्तित किया जा रहा है. जबकि दूसरे चरण में सूचना और प्रौद्योगिकी से संबंधित यानी हार्डवेयर और सपोर्ट सर्विसेज, टेक्नोलॉजी, लेजर शो, डिजिटल मैपिंग प्रोजेक्शन, स्टोरीटेलिंग, फिल्म, वर्चुअल रियलिटी, ऑडियो विजुअल और तकनीकी तत्व आदि का काम किया जाएगा.

    सामुद्रिक तकनीकी से निर्माण 

    नवीनतम निर्माण तकनीक का उपयोग करके समुद्रिक तकनीकी द्वारा एक हरित अनुरूप संरचना का निर्माण किया जा रहा है. इससे मूल इमारत की विरासत को संरक्षित कर अत्याधुनिक बनाया जा रहा है. अधिकांश स्मारक भूमिगत है, जिसमें एक अत्याधुनिक संग्रहालय, संग्रह, सभागार, बफर टैंक, भूमिगत टैंक, सीवेज उपचार संयंत्र और वर्षा जल संचयन टैंक आदि शामिल हैं. स्मारक का निर्माण कार्य 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है. शेष कार्य तेजी से चल रहा है.

    स्मारक में एक हजार लोगों की क्षमता 

    एमएमआरडीए कमिश्नर एसवीआर श्रीनिवास ने बताया कि “बालासाहेब ठाकरे मेमोरियल का निर्माण प्राधिकरण के लिए सम्मान की बात है. एमएमआरडीए ने निर्माण के दौरान बाधित होने वाले लगभग 230 पुराने और बड़े पेड़ों को बचाने के लिए डिजाइन को संशोधित किया है. इस स्मारक से अरब सागर के विहंगम दृश्य का भी आनंद उठाया जा सकता है. स्मारक में एक समय में एक हजार लोगों की क्षमता होगी.

     

  • शिवसेना उद्धव गुट और वंचित का गठबंधन फिक्स

    शिवसेना उद्धव गुट और वंचित का गठबंधन फिक्स

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क

    ShivSena Vanchhit Bahujan Aghadi: मुंबई. शिवसेना उद्धव गुट और वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख नेता आखिरकार अब एक साथ आने के लिए तैयार हो गए हैं. सोमवार को इस गठबंधन की घोषणा होगी. (Shiv Sena Uddhav faction and Vanchit’s alliance fixed)

    शिवसेना विभाजन के बाद महाविकास आघाड़ी का कुनबा बढ़ाने के लिए उद्धव ठाकरे ने शिवशक्ति (Shivshakti) और भीमशक्ति ( BhimShakti) को एक साथ आने का नारा दिया था. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर के साथ बैठक भी हुई थी लेकिन सोमवार दोपहर एक बजे इस गठबंधन पर मुहर लगने जा रही है. सोमवार को उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray)और प्रकाश आंबेडकर  (Prakash Ambedkar) संयुक्त पत्रकार परिषद में इसकी घोषणा करेंगे.

    विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता अंबादास दानवे ने कहा कि शिवशक्ति और भीमशक्ति कल एक साथ आ रहे हैं. शिवशक्ति,भीमशक्ति एक साथ आएं यह बाला साहेब के विचार थे. दानवे ने कहा कि इस गठबंधन में कांग्रेस और एनसीपी को भी शामिल करने का प्रयास किया जाएगा.

    वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि वे महाविकास आघाड़ी के दलों ( कांग्रेस – राष्ट्रवादी कांग्रेस) के साथ आने के लिए तैयार हूं. लेकिन वे साथ आ रहे हैं कि नहीं यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए. बहरहाल शिवसेना सुभाष देसाई और वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धार्थ मोकले का पत्रकार परिषद आमंत्रण पत्र में हस्ताक्षर किया गया है. जिसमें कहा गया है कि शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एंड. प्रकाश आंबेडकर की संयुक्त पत्रकार परिषद एक बजे बाबा साहेब आंबेडकर भवन में आयोजित की गई है. इस पत्रकार परिषद में गठबंधन की घोषणा की जाएगी.

     

     

     

     

  • बीएमसी ज्वाइंट कमिश्नर सुनील धामणे पर दर्ज करो एफआईआर

    बीएमसी ज्वाइंट कमिश्नर सुनील धामणे पर दर्ज करो एफआईआर

    आईएनएस न्यूज नेटवर्क
    मुंबई. बीजेपी नेता किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) ने आज एक बार फिर मुंबई मनपा (Somaya Exposed BMC Sunil Dhamne)पर कोरोना काल में रेमडेसिविर की काला बाजारी चलाने का आरोप लगाया है. सोमैया ने शिवसेना सांसद संजय राउत के करीबी सुजीत पाटकर पर 100 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. फर्जी स्टैंप पेपर लगाने के बाद भी कार्रवाई नहीं करने वाले बीएमसी के ज्वाइंट कमिश्नर सुनील धामणे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.
    धामणे ने की कार्रवाई नहीं करने की शिफारिश 
    पत्रकार परिषद में सोमैया ने कहा कि मुंबई मनपा के संबंधित नेताओं ने इस मामले में दो सदस्यीय समिति नियुक्त की थी, मनपा ने 6 अप्रैल, 2022 को संयुक्त आयुक्त सुनील धामणे की अध्यक्षता में इस समिति को नियुक्त करने का निर्णय लिया था. धामणे ने इस संबंध में एक रिपोर्ट सौंपी, लेकिन रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नकली  साबित होने के बाद भी. सुनील धामणे ने सुझाव दिया कि इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. सोमैया ने सुनील धामणे को बीएमसी से बर्खास्त करने की मांग की है.
      एक स्टैंप पेपर पर दो ठेके
     सोमैया ने कहा कि दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. बीएमसी ने एक ही स्टैंप पेपर पर दो ठेके दिए है. सोमैया ने इस मामले में बीएमसी पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है.
      ज्यादा कीमत पर खरीदी गई रेमडेसिविर 
    सोमैया ने कहा कि यह साबित हो गया है कि रेमडेसिविर का भ्रष्टाचार तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार और उनकी एफडीए ने किया था. मैंने इस मामले में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत से बात की है, उन्होंने भी इस लोकायुक्त रिपोर्ट पर कार्रवाई करने पर टिप्पणी की है. उस समय इस तथ्य की जांच की जानी चाहिए कि रेमेडिसविर एक कंपनी को अधिक कीमत पर खरीदने की अनुमति एफडीए द्वारा दी गई थी. उस समय कोई प्रभावी तंत्र नहीं था और इसकी जांच होनी चाहिए. साथ ही सोमैया ने यह भी मांग की है कि शिंदे फडणवीस सरकार आपदा प्रबंधन अधिनियम में लोकायुक्त द्वारा सुझाए गए प्रावधानों को स्वीकार करे.