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म्हाडा ने जीटीबी नगर सिंधी शरणार्थियों की 25 इमारतों के पुनर्विकास के लिए निर्माण और डेवलपमेंट एजेंसी की नियुक्ति की

म्हाडा उपाध्यक्ष संजीव जायसवाल ने मेसर्स कीस्टोन को सौंपा स्वीकृति पत्र

आईएनएस न्यूज नेटवर्क

मुंबई।  महाराष्ट्र गृह एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने गुरु तेग बहादुर नगर (जी.टी.बी. नगर) सायन कोलीवाड़ा कोलीवाड़ा में सिंधी शरणार्थियों की 25 इमारतों के पुनर्विकास के लिए मेसर्स कीस्टोन रियलटर्स (रुस्तमजी ग्रुप) को निर्माण एवं विकास एजेंसी नियुक्त किया है, जिसे 1958 में स्वतंत्रता के बाद भारत से आए प्रवासियों के लिए बनाया गया था। म्हाडा के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जायसवाल द्वारा आज डेवलपर को आशय पत्र प्रस्तुत किया गया। (MHADA appoints construction and development agency for redevelopment of 25 buildings of GTB Nagar Sindhi refugees)

बांद्रा पूर्व स्थित म्हाडा मुख्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम भावनाओं से भरे माहौल में संपन्न हुआ। यह दिन उन निवासियों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया जो लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे थे। इस कार्यक्रम में विधायक कैप्टन तमिल सेलवन, म्हाडा मुंबई बोर्ड के मुख्य अधिकारी मिलिंद बोरिकर, कीस्टोन रियलटर्स (रुस्तमजी ग्रुप) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बोमन ईरानी, ​​उप मुख्य अभियंता  भूषण देसाई और  राहुल वटकर मौजूद थे। इसके साथ ही जी.टी.बी. नगर की विभिन्न हाउसिंग सोसायटियों के पदाधिकारी और निवासी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
करीब 11.20 एकड़ क्षेत्र में फैली इस ऐतिहासिक जी.टी.बी. नगर बस्ती में सिंधी शरणार्थियों की 25 इमारतों में करीब 1,200 फ्लैट थे। 2020 में बीएमसी द्वारा इन इमारतों को खतरनाक घोषित करने के बाद इन्हें गिरा दिया गया और निवासियों को कहीं और बसना पड़ा। निवासियों की मांग के अनुसार सरकार ने म्हाडा के माध्यम से निजी भूमि पर इस पुनर्विकास परियोजना को लागू करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में म्हाडा मुंबई हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से परियोजना को लागू करने के लिए एक नीति बनाई गई थी। सायन कोलीवाड़ा में सिंधी शरणार्थियों के भवनों के पुनर्विकास के लिए म्हाडा के माध्यम से एक निर्माण और विकास एजेंसी नियुक्त करने का प्रस्ताव विनियमन 33 (9) के तहत 14.02.2024 को कैबिनेट की बैठक में अनुमोदित किया गया था।

तदनुसार, गृहनिर्माण विभाग के दिनांक 23.02.2024 के सरकारी निर्णय के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना के लिए म्हाडा को विशेष योजना प्राधिकरण के रूप में अनुमोदित किया गया है। म्हाडा द्वारा निविदा प्रक्रिया को लागू किया गया था।

म्हाडा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार विकास नियंत्रण विनियमन 33 (9) के अंतर्गत फंसिबल क्षेत्र सहित न्यूनतम 4.5 वर्ग मीटर क्षेत्र उपलब्ध होगा। प्रत्येक परिवार को 635 वर्ग फीट का घर मुफ्त मिलेगा। म्हाडा को हाउसिंग स्टॉक के रूप में 25 हजार 700 वर्ग मीटर क्षेत्र मिलेगा।

इस अवसर पर म्हाडा के उपाध्यक्ष और सीईओ संजीव जयसवाल ने कहा कि जी.टी.बी. नगर की सिंधी शरणार्थी इमारत पुनर्विकास परियोजना निर्माण और विकास एजेंसी द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली पहली पुनर्विकास परियोजना है। निजी भूमि पर स्थित इमारतों का पुनर्विकास म्हाडा द्वारा किया जाएगा और यह एक ऐतिहासिक, पायलट परियोजना होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के लिए संबंधित एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं। जायसवाल ने कहा कि इस परियोजना की प्रगति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। साथ ही, इन हाउसिंग सोसायटियों के 5 से 7 सदस्यों की एक समिति बनाई जानी चाहिए ताकि समय-समय पर इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की जा सके। उन्होंने निर्देश दिया कि इस पुनर्विकास परियोजना के 1200 निवासियों को प्राथमिकता के आधार पर पुनर्वासित किया जाए।  जयसवाल ने यह भी आश्वासन दिया कि उक्त परियोजना के लिए म्हाडा द्वारा सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।

*1,200 निवासियों को 635 वर्ग फुट का मकान निःशुल्क मिलेगा।
* पुनर्विकास के बाद, म्हाडा निवासियों को पांच वर्षों तक रखरखाव शुल्क प्रदान करेगी।
* परियोजना पूरी होने तक 20,000 रुपए प्रति माह किराया।

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