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जौनपुर सदर कांग्रेस ने बदला प्रत्याशी, सपा ने नामांकन से रोका
बसपा के दांव से मची खलबली

आईएनएस न्यूज नेटवर्क
Up Election 2022: विधानसभा चुनाव में एक- एक सीट जीतने के राजनीतिक पार्टियां आखिरी समय तक दांव आजमाती हैं. जौनपुर जिले की सदर सीट पर प्रत्याशी घोषित होने के बाद कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदल दिया. सपा ने भी घोषित उम्मीदवार का नामांकन रोक दिया है.
इनसाइट न्यूज स्टोरी ने पहले ही खबर छापी थी कि टिकट नहीं मिलने की सूरत में नदीम जावेद बड़ा कदम उठा सकते हैं. कांग्रेस की तरफ से तबरेज को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भी जावेद ने नामांकन का सेट खरीदा था. उनकी बात बसपा से भी चल रही थी लेकिन बसपा ने सलीम खान को टिकट दे दिया. मुस्लिम वोटरों पर जावेद की अच्छी पकड़ को देखते हुए उन्हें टिकट देना पड़ा.
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भाजपा ने सदर सीट से निवर्तमान विधायक राज्य मंत्री गिरीश यादव यादव को टिकट दिया है. कांग्रेस ने फैसल हसन तबरेज को उम्मीदवार घोषित किया था. सपा ने तेजबहादुर मौर्य पप्पू को प्रत्याशी घोषित किया था. और सबसे आखिर में बसपा ने मुस्लिम उम्मीदवार सलीम खान को उतार कर सभी पार्टियों को बैकफुट पर ला दिया था. दरअसल सदर सीट पर 90,000 मुस्लिम मतदाता हैं. बसपा ने यह मैदान खाली देख मुस्लिम को टिकट दिया था, क्योंकि तबरेज को कमजोर प्रत्याशी माना जा रहा था. बसपा के इस दांव से सपा ने अपने उम्मीदवार पप्पू मौर्या को नामांकन करने से रोक दिया था. अब कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार बदल दिया है. इस सीट से पूर्व विधायक रहे नदीम जावेद को टिकट दे दिया है.
2017 में भाजपा के गिरीश चंद यादव को 90324 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस के नदीम जावेद 78040 पाकर दूसरे स्थान पर रहे. 2012 के विधानसभा में कांग्रेस से नदीम जावेद 50863 वोट पाकर विधायक बने थे. बसपा के तेज बहादुर मौर्य 49624 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे. 2007 विधानसभा चुनाव में जावेद अंसारी समाजवादी पार्टी से विधायक बने. बसपा के तेज बहादुर मौर्य दूसरे स्थान पर रहे. 2002 के विधानसभा चुनाव में सुरेंद्र प्रताप बीजेपी से जीतकर विधानसभा पहुंचे. जावेद अहमद सपा के दूसरे स्थान पर रहे.
ऐसा है मतदाताओं का समीकरण
सदर विधानसभा सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक माने जाते हैं. यहां सपा, बसपा और कांग्रेस से मुस्लिम चेहरे जीतते रहे. हालांकि भाजपा के प्रत्याशियों को भी यहां जीत मिली है. जातीय समीकरण देखे तो यहां मुसलमान निर्णायक मतदाता माने जाते हैं. दूसरे नंबर पर वैश्य मतदाता हैं, जबकि ठाकुर तीसरे और दलित मतदाता चौथे नंबर पर है




