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अग्निपथ योजना में प्रदर्शनकारियों की नो एंट्री हर हाल में लागू होगी योजना

भारतीय सशस्त्र बलों में इसी से होंगी सभी भर्तियां

आईएनएस न्यूज नेटवर्क
 Agnipath Scheme दिल्ली. देश भर में अग्निपथ योजना को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि इस योजना के तहत फॉर्म भरने वालों को इस बात का प्रमाण पत्र देना होगा कि वे किसी तरह के विरोध प्रदर्शनों या आगजनी में शामिल रहे हैं. इसी के साथ केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह योजना वापस नहीं होगी. उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में  जितनी भी भर्तियां होंगी सभी इसी में से की जाएंगी.
रक्षा मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पांडे ने कहा कि अनुशासन भारतीय सेना की नींव है. यहां आगजनी या विरोध प्रदर्शन की कोई जगह नहीं है.जो अग्निपथ योजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं यदि उनका नाम एफआईआर में आता है तो सेना में शामिल नहीं हो सकेंगे.
लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पांडे ने कहा  कि सभी को इस बात के लिए सर्टिफिकेट देना होगा कि उन्होंने किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन या तोड़ फोड़ में नहीं शामिल नहीं रहे हैं. इसके लिए उन्हें पुलिस वेरिफिकेशन देना होगा.
 दिसंबर से पहले होगी पहले बैच की भर्ती
अग्निपथ योजना को लेकर लेफ्टिनेंट जनरल बंसी पोनप्पा ने कहा कि इस साल दिसंबर के अंदर 25 हजार अग्निवीरों के पहले बैच की भर्ती पूरी हो जाएगी. फरवरी 2023 तक दूसरे बैच की शुरुआत की जाएगी. दूसरे बैच में करीब 40 हजार अग्निवीरों को  प्रशिक्षण दिया जाएगा.
   सेवा शर्तों में नहीं होगा भेदभाव
लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी ने कहा कि हर साल लगभग 17,600 लोग तीनों सेवाओं से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले रहे हैं. किसी ने कभी उनसे यह पूछने की कोशिश नहीं की कि वे सेवानिवृत्ति के बाद क्या करेंगे. ‘अग्निवीर’ को सियाचिन और अन्य क्षेत्रों में तैनाती पर वही भत्ता मिलेगा जो वर्तमान में सेवारत नियमित सैनिकों पर लागू होता है. सेवा शर्तों में अग्निवीरों के लिए कोई भेदभाव नहीं होगा. अगले 4-5 वर्षों में, हम ( सैनिकों का ) 50-60,000 तक भर्तियां करेंगे और बाद में यह बढ़कर 90,000 से 100000 हो जाएगा.
    शहादत पर  मिलेगा एक करोड़
देश की सेवा में शहीद होने वाले ‘अग्निवीर’ को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा.  उनके लिए अलग से किसी बैरक या ट्रेनिंग सेंटर की व्यवस्था नहीं की जा रही है. अग्निवीर भी नियमित सैनिकों के बराबर की सुविधाएं पाएंगे. पहले से मौजूद आधारभूत ढांचा का लाभ उठाएंगे.

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