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आज 2 बजे आएगा श्रृंगार गौरी ज्ञानवापी केस शिवलिंग कार्बन डेटिंग का फैसला
वाराणसी में जगह जगह चल रहा पूजा पाठ

आईएनएस न्यूज नेटवर्क
वाराणसी. वाराणसी (Varansi)की अदालत आज दोपहर 2 बजे ज्ञानवापी मस्जिद (shringar gauri gyanvapi case carbon dating key vardict today) के अंदर मिली संरचना की कार्बन डेटिंग की मांग करने वाली हिंदू पक्ष की याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा . हिंदू पक्ष की तरफ से ‘शिवलिंग’ होने का दावा किया गया था. पांच हिंदू याचिकाकर्ताओं में से चार ने वाराणसी की स्थानीय अदालत द्वारा आदेशित वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पाए गए ‘शिवलिंग’ की कार्बन-डेटिंग की मांग की है.
कार्बन डेटिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर पुरातत्व में किसी वस्तु की उम्र को समझने के लिए किया जाता है. ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने कार्बन डेटिंग की याचिका का विरोध किया है.
वाराणसी की अदालत ने मामले के संबंध में पहले मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनी थीं. हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील विष्णु जैन ने कहा, “मुस्लिम पक्ष ने कहा कि शिवलिंग सूट संपत्ति का हिस्सा नहीं है और इसकी कार्बन डेटिंग नहीं की जा सकती है. हमने इन दोनों बिंदुओं पर अपना स्पष्टीकरण दिया था अब अदालत ने अपना फैसला सुनाएगा .
मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले अखलाक अहमद ने कहा कि हिंदू पक्ष की दलील विचारणीय नहीं है क्योंकि यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ है जिसमें संरचना की रक्षा करने (जिसे मुस्लिम पक्ष एक फव्वारा होने का दावा करता है और हिंदू पक्ष शिवलिंग होने का दावा करता है) के लिए कहा गया था.
अहमद ने कहा कि हमने कार्बन डेटिंग पर आवेदन का जवाब दिया. स्टोन में कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने 17 मई के आदेश में, जिसके अनुसार, आयोग द्वारा पाई गई वस्तु को संरक्षित किया जाना था. हिंदू पक्ष के अनुसार, प्रक्रिया वैज्ञानिक होगी, यदि ऐसा है, तो भी वस्तु के साथ छेड़छाड़ होगी. परीक्षण के लिए रसायनों का उपयोग किया जाएगा.
मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले एक अन्य वकील तोहिद खान ने कहा, “अदालत अपना फैसला सुनाएगी कि कार्बन डेटिंग की मांग करने वाला आवेदन स्वीकार्य है या खारिज कर दिया जाना चाहिए. संरचना एक फव्वारा है और शिवलिंग नहीं है. फव्वारे को अभी भी चालू किया जा सकता है. अदालत दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 29 सितंबर को अपना आदेश सुरक्षित कर दिया था. हिंदू पक्ष का कहना है कि वजूखाना में पाया गया शिवलिंग है जबकि मुस्लिम पक्ष में उसे फव्वारे का स्ट्रक्चर बताया था.




