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नासिक के म्हाडा आरक्षण’ की जांच करेगी एसआईटी  एक महीने के भीतर रिपोर्ट जमा करने के आदेश

आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई।  नासिक म्हाडा प्रोजेक्ट में आरक्षण में अनियमितता कर गरीबों के हिस्से का घर छीनने वालों की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी से जांच कराने का आदेश दिया है। राजस्व मंत्री बावनकुले ने कहा कि  गरीबों का अधिकार  छीनने वाले लोग चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। बावनकुले ने नासिक के म्हाडा कोटा में अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों की भागीदारी वाली एक विशेष जांच समिति (एसआईटी) के गठन की घोषणा की।  +SIT to Investigate Nashik’s ‘MHADA Reservation Scams, Orders Issued to Submit Report Within One Month.)

नासिक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित 20 प्रतिशत म्हाडा कोटा के कार्यान्वयन में अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने घोषणा की है कि एक विशेष जांच समिति (एसआईटी) अगले महीने के भीतर इस मामले की पूरी जांच करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर, राजस्व मंत्री बावनकुले ने नासिक विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति (एसआईटी) का गठन किया है।

राज्य विधानसभा के बजट सत्र में विधायक देवयानी फरांदे और नितिन पवार ने नासिक में प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और म्हाडा आरक्षण के मुद्दे पर सुझाव दिए थे। चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसे देखते हुए राजस्व मंत्री ने मामले की गहन जांच के लिए एक समिति गठित करने का वादा किया था।

ये होंगे जांच समिति के सदस्य
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों सहित यह समिति एक महीने के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
विभागीय आयुक्त, नासिक, बंदोबस्त आयुक्त (पुणे), पंजीकरण महानिरीक्षक एवं स्टाम्प नियंत्रक (पुणे), पुलिस आयुक्त (नासिक) और नगर नियोजन एवं विकास निदेशक (पुणे)।  उप निदेशक भूमि अभिलेख, नासिक विभाग सदस्य सचिव होंगे।

• समिति की जांच के मुख्य बिंदु

: 8 नवंबर 2013 की अधिसूचना के अनुसार, उन मामलों की जांच करना जहां 4000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले लेआउट में 20% भूखंड या फ्लैट म्हाडा को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।: जांच में दोषी पाए गए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करना।
अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार भूस्वामियों या विकासकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का प्रस्ताव करना। समिति भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए उठाए जाने वाले उपायों पर भी मार्गदर्शन देना।

नासिक में एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है जिसमें कई बिल्डरों ने म्हाडा की घरकुल योजना के तहत फर्जी दस्तावेजों, फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की है।
नियमों के अनुसार, 4,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में आवासीय परियोजना का निर्माण करते समय, किसी भी बिल्डर के लिए उस परियोजना में 20 प्रतिशत मकान (MHADA) के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है। इस योजना का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को किफायती आवास उपलब्ध कराना है। हालांकि, यह बात सामने आई है कि बिल्डरों ने इस नियम से बचने के लिए जानबूझकर आवासीय परियोजना का क्षेत्रफल कम बताया है और जाली दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से सरकार को गुमराह भी किया है। भूमि अभिलेख कार्यालय द्वारा किए गए सत्यापन में कुल 128 मामलों की जांच की गई। इनमें से 49 मामलों में सरकार के खिलाफ धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, और भूमि अभिलेख विभाग की शिकायत पर सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।

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