Breaking News

12 वर्षों में 190 से 600 पहुंची बाघों की संख्या

बाघों के संरक्षण में महाराष्ट्र का तीसरा स्थान

आईएनएस न्यूज नेटवर्क

मुंबई।  महाराष्ट्र  में बाघों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाघ संरक्षण कार्य किया जा रहा है। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक नई पंचसूत्री योजना तैयार की गई है। इसका परिणाम यह हुआ कि 12 वर्ष  पहले जहां बाघों की संख्या राज्य में 190 थी अब बढ़ कर 444 हो गई है। जल्द ही बाघों की गणना की जाएगी जिसमें यह संख्या 600 पहुंचने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह जानकारी दी।  फडणवीस ने यह भी कहा कि सरकार मूल्य आधारित बाघ संरक्षण के लिए प्रयासरत है। (Number of tigers increased from 190 to 600 in 12 years)

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में आयोजित एक सम्मेलन में मुख्यमंत्री बोल रहे थे। इस अवसर पर वन मंत्री गणेश नाइक , शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर , वित्त एवं योजना राज्य मंत्री एडवोकेट आशीष जायसवाल , मुख्यमंत्री के मुख्य  आर्थिक सलाहकार प्रवीण परदेशी , वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैस्कर , प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) श्रीनिवास राव और कंबोडिया , भूटान और बांग्लादेश के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा , बाघ प्राकृतिक  आवास और खाद्य श्रृंखला का केंद्र हैं। इनका संरक्षण पर्यावरण और वनों की रक्षा करता है। इसीलिए राज्य में बाघ संरक्षण का कार्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चल रहा है। राज्य के 6 बाघ अभ्यारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गांवों को विस्थापित किया गया है और नए बफर जोन बनाए गए हैं। वन विभाग की नई नीति के कारण बाघ अभ्यारण्यों के निकट रहने वाले ग्रामीणों ने पुनर्वास और विस्थापन की पहल की है। बाघ अभ्यारण्यों के निकट के गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक सुनियोजित कार्य योजना तैयार की गई है। बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैकिंग और एआई-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जैसे उपाय किए गए हैं। इससे बाघों के संरक्षण , जैव विविधता और पर्यटन के लिए एक नया पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है। परिणामस्वरूप, राज्य में बाघों की संख्या 2014 में 190 से बढ़कर 444 हो गई है और नई बाघ जनगणना में यह संख्या 600 से अधिक हो जाएगी ।

भारत में विश्व की 75 प्रतिशत बाघ आबादी है और  महाराष्ट्र भारत में बाघों की संख्या में तीसरे स्थान पर है। पिछले दो दशकों में बाघ संरक्षण के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों के कारण, महाराष्ट्र देश में बाघों की संख्या में पहले स्थान की ओर अग्रसर है। बाघों के अस्तित्व के महत्व को समझते हुए और इसे मानव जीवन और अस्तित्व के साथ समन्वयित करते हुए, सरकार मूल्य-आधारित बाघ संरक्षण के लिए प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघ संरक्षण के लिए पांच सिद्धांत तैयार किए गए हैं, जिनमें मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना , बाघ आवास हरित आजीविका मिशन को लागू करना , बाघ संरक्षण के लिए सीएसआर निधि उपलब्ध कराने हेतु सीएसआर नीति तैयार करना , सतत पर्यटन नीति बनाकर रोजगार सृजन करना और पर्यटन को बढ़ावा देते हुए वन संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराना शामिल है।

Related Articles

Back to top button