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बोगियों में ठूंस ठूंस कर भरे थे यात्री, जनसंख्या के अनुपात में कहीं नहीं ठहरती ट्रेनों की संख्या

आईएनएस न्यूज नेटवर्क

Orissa Train Accident दिल्ली.  उड़ीसा के बालासोर जिले में  कोरामंडल एक्सप्रेस, यशवंतपुर हावड़ा एक्सप्रेस  और मालगाड़ी दुर्घटना के हालात बहुत ही भयावह हैं.(Passengers were packed to the brim, the number of trains Sufficient nowhere in proportion to the population)

पांच बोगियों में सबसे ज्यादा यात्रियों की मौत हुई है. घायलों को निकालने के बाद मृतकों को निकाला जा रहा है. ताजा खबर के अनुसार मृतकों की संख्या 300 को पार कर गई है. 1000 से अधिक लोग घायल है जिनमें कई यात्रियों की हालत बहुत गंभीर बताई जा रही है.  देश को आजाद हुए 70 वर्ष से अधिक हो गये रेल विभाग जनसंख्या के लिहाज से ट्रेनों की संख्या बढ़ाने बहुत कमजोर साबित हुआ है.  5 मई 2023 की कोरामंडल एक्सप्रेस की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें दिख रहा है कि जनरल कोच में यात्री ठूंस ठूंस कर भरे हुए हैं. पैर रखने की भी जगह नहीं है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दुर्घटनाग्रस्त बोगियों में कितने यात्री भरे रहे होंगे.

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Railway minister Ashvini Vaishnav

देश की आबादी 130 करोड़ से आगे निकल चुकी है लेकिन रेलवे का जितनी तेजी से यात्रियों के सुविधाजनक और तकनीकी तौर विस्तार होना चाहिए था नहीं हुआ. एक कोच में केवल 72 यात्रियों के बैठने और सोने की जगह होती है लेकिन उसमें दोगुने से भी अधिक यात्री भरे रहते हैं. यही कारण है कि जिन पांच बोगियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है उनमें से ज्यादातर जनरल कोच हैं. और उसमें बैठने वाले गरीब, मजदूर.

कोरामंडल एक्सप्रेस में 05 मई की तस्वीर
कोरामंडल एक्सप्रेस में 05 मई की तस्वीर

देश में बढ़ रही आबादी के हिसाब से पैसेंजर ट्रेनों की संख्या करीब 22,600 है, इसमें करीब 75,000 यात्री कोच हैं. देश में प्रतिदिन 13,668 ट्रेनें चलाई जाती हैं. इसके अलावा माल ढुलाई के लिए 9161 मालगाड़ी ट्रेन हैं. 23 करोड़ लोग प्रतिदिन ट्रेन से यात्रा करते हैं. हालांकि यह संख्या इससे भी अधिक हो सकती है.वंदे भारत ट्रेनें भी शुरू की गई है.

लेकिन पैसेंजर ट्रेनों के स्थान पर ही इनको शुरू किया जा रहा है. इन सबके बावजूद करीब 5 से 8 करोड़ लोग वेटिंग टिकट लेते हैं. ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या के लिहाज से टिकटों का आरक्षण नहीं हो पाता. वेटिंग टिकट वाले यात्री आरक्षित, अनारक्षित बोगियों में बैठ कर किसी तरह अपनी यात्रा पूरी कर लेते हैं. निष्कर्ष यह है कि यदि एक बोगी में तय मानदंडों के अनुसार यात्रियों को बैठने की अनुमति मिलती तो किसी भी हादसे के बाद हताहतों की संख्या निश्चित रूप से कम होती.

 

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