Breaking Newsइंफ्रास्ट्रक्चरमुंबई

अटल सेतु का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज करेंगे लोकार्पण

अटल सेतु’ से मुंबई महानगर क्षेत्र का समग्र विकास

आईएनएस न्यूज नेटवर्क

मुंबई. मुंबई को भारत के मुख्य भूभाग से जोड़ने वाला और  समय में बचत करने वाला ‘अटल बिहारी वाजपेयी शिवडी- न्हावा सेवा अटल सेतु’ ( Atal Setu) लोकार्पण का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण किया जाएगा. इस सेतु से  मुंबई सहित क्षेत्र के समग्र विकास में सुधार होगा, यात्रियों की सुरक्षा का ख्याल और मुंबई शहर के चौतरफा विस्तार में यह सेतु ‘गेम चेंजर’ साबित होगा. (Prime Minister Narendra Modi will inaugurate Atal Setu today)
मुंबई एक अंतरराष्ट्रीय शहर है. द्वीपों के शहर मुंबई के निवासियों की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए सरकार ने विभिन्न परियोजनाएं लागू की हैं. इसके अगले चरण के रूप में मुंबई को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ने वाला मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (MTHL) यानी ‘अटल सेतु’ अस्तित्व में आ गया है और इसके माध्यम से मुंबईकरों का एक सपना अब साकार होने जा रहा है. मुंबई महानगर क्षेत्र में परिवहन नेटवर्क का विस्तार करते हुए, देश के इस सबसे बड़े समुद्री पुल का निर्माण मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा किया गया है और अब यह यातायात के लिए खुलने जा रहा है.

परियोजना की विशेषताएं 

समुद्र, जमीन और दलदल इन तीनों क्षेत्रों में निर्मित 21 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए तीन स्थापित ठेकेदारों, एक इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठेकेदार, 10 देशों के विशेषज्ञों ने अपना योगदान दिया है. 1500 से अधिक इंजीनियरों तथा लगभग 16 हजार 500  कुशल मजदूरों ने तीन शिफ्ट में दिन- रात काम किया है.  इस प्रोजेक्ट में करीब 1.2 लाख टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है. इतनी मात्रा में स्टील से चार हावड़ा ब्रिज बनाए जा सकते हैं. प्रोजेक्ट में 8 लाख 30 हजार क्यूबिक मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है. यह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को खड़ा करने में इस्तेमाल किए गए कंक्रीट से छह गुना ज्यादा है. इस परियोजना में उपयोग किया गया स्टील एफिल टॉवर में इस्तेमाल किए गए स्टील से 17 गुना अधिक है. लगभग एक हजार खंभों पर बने इस मार्ग पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा की जा सकती है और प्रतिदिन लगभग 70 हजार वाहनों की आवाजाही की क्षमता ये सेतु रखता है।
अटल सेतु
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज करेंगे अटल सेतु का लोकार्पण
ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन होगा कम 
अटल सेतु की कुल लंबाई 22 किमी है जिसमें से 16.5 किमी समुद्र में है और लगभग 5.5 किमी जमीन पर है. दोनों तरफ तीन-तीन लेन होंगी. ईस्ट एक्सप्रेस वे को जोड़ा गया है और ईस्ट-वेस्ट वर्ली-शिवडी एलिवेटेड एक्सप्रेस वे को भविष्य में अटल सेतु परियोजना से जोड़ा जाएगा. इससे दक्षिण मुंबई और पश्चिमी उपनगरों से मुंबई सी कोस्ट रोड के जरिए आने वाले यात्री अटल सेतु के जरिए बिना रुके मुख्य भूमि तक पहुंच सकेंगे. जाहिर है, यात्रा की दूरी कम होने से एक घंटे से अधिक की यात्रा का समय बचेगा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी कम होगा.
इंटरचेंज से जुड़ेंगे कई इलाके 
पुल के दूसरी ओर नवी मुंबई के उलवे स्थित शिवाजी नगर, उरण-पनवेल राज्य महामार्ग और मल्टीमॉडल कॉरिडोर चिर्ले में इंटरचेंज किया गया है. इसके माध्यम से नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी, पुणे या गोवा से यात्री, भारी वाहन आसानी से मुंबई में प्रवेश कर सकेंगे। यह सेतु मार्ग मुंबई-गोवा महामार्ग, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, वसई-विरार, नवी मुंबई, रायगढ़ जिले की विभिन्न संपर्क सड़कों से जोड़ा जाएगा, जिससे उनके बीच की दूरी कम हो जाएगी.
MTHL में भूकंप को झेलने की क्षमता
अटल सेतु के निर्माण में पर्यावरण संतुलन का ध्यान रखा गया है.इस क्षेत्र में स्थानांतरित पक्षियों, विशेषकर फ्लेमिंगो, का प्राकृतिक आवास है इसलिए परियोजना के समंदर क्षेत्र के मैंग्रोव और दलदल इत्यादि पर्यावरण से संबंधित विशेषताओं को कम से कम नुकसान हो, इसका  पूरा ख्याल एमएमआरडीए ने रखा है. सुरक्षा के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, बंद होने वाले वाहनों को ले जाने के लिए स्वतंत्र आपातकालीन लेन, दुर्घटना-रोधी बाधाओं के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम और पक्षियों को किसी भी असुविधा से बचाने के लिए ध्वनि अवरोधक (साउंड बैरियर्स) स्थापित किए गए हैं. परियोजना को भूकंप, चक्रवात, हवा के दबाव और ज्वार के प्रभावों को झेलने में सक्षम बनाया गया है. समुद्री पुल के घटक अगले 100 वर्षों तक टिके रह सकें, इसके लिए जंग प्रतिरोधी सामग्री से बनाए गए हैं.

सर्वांगीण विस्तार के लिए सहायक
मुंबई द्वीप की भौगोलिक सीमाओं के कारण, शहर में जमीन की कमी की समस्या हल हो जाएगी और अभी भी उपनगरीय रेलवे पर निर्भर होने के कारण प्रमुख रूप से उत्तर-दक्षिण में विस्तारित मुंबई शहर के सर्वांगीण विस्तार में ये परियोजना सहायक होगी. इस परिसर में दस विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे. स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर रहा महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण मुंबई क्षेत्र के नागरिकों को विकास के नए अवसर प्रदान कर रहा है और अटल सेतु के रूप में प्राधिकरण के सिर पर ताज चढ़ने जा रहा है.
समय और ईंधन की बचत होगी. इस परियोजना के कारण तीसरी मुंबई के रूप में माने जाने वाले क्षेत्र में बड़े उद्योगों और विकास परियोजनाओं के आने से आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक के संदर्भ में समग्र व सतत विकास में मदद मिलेगी.  इससे क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. इसमें कोई संदेह नहीं है कि अर्थव्यवस्था को अपेक्षित बढ़ावा मिलने और नए रोजगार सृजन के कारण यह परियोजना ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाली है.

Related Articles

Back to top button