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नए और पुराने टैक्स स्लैब की दरें जो आपके लिए जानना जरूरी

टैक्स बचाने के लिए अधिक इन्वेस्ट एक विकल्प 

आईएनएस न्यूज नेटवर्क

Union Budget 2023-24 नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman)  ने आज यूनियन बजट पेश किया जिसमें कहा गया है कि 7 लाख रुपए तक की आय को रिबेट के दायरे में ले आया गया है. इससे पहले रिबेट केवल 5 लाख रुपए तक की आय पर मिलती थी. इसके साथ ही 3 लाख रुपए तक की आय को टैक्स स्लैब से बाहर कर दिया गया.

ऐसे है नए और पुराने स्लैब की दरें

नई स्लैब 3 लाख रुपए से अधिक की आय से शुरू होगी. जहां पहले 2.5 रुपए तक की आय टैक्स से छूट  थी, वहीं अब यह बढ़कर 3 लाख रुपए हो गई है. हालांकि, जो भी बदलाव हुए हैं नए टैक्स रिजीम के तहत ही हुए हैं.  2020 से पहले  की जो पुरानी टैक्स रिजीम  है उसमें टैक्स स्लैब पहले जैसे ही हैं. सरकार की मंशा है कि ज्यादा लोगों  को नई टैक्स प्रणाली से जोड़ा  जाए. इसे अधिक सरल टैक्स व्यवस्था माना जाता है.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करते हुए
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करते हुए

स्लैब के अनुसार टैक्स की दर 

नई टैक्स प्रणाली में पहला स्लैब 3-6 लाख रुपए का है जिस पर 5 फीसदी टैक्स है, लेकिन रिबेट लागू होने के कारण यहां प्रभावी रूप से कोई टैक्स नहीं लगता है. इसके बाद आती है 6-9 लाख रुपए की टैक्स स्लैब, जिसमें 10 फीसदी टैक्स चुकाना है. गौर करने वाली बात है कि  7 लाख तक की आय रिबेट में आती है तो वहां भी टैक्स नहीं लगेगा. इसके बाद 9-12 लाख का स्लैब जिस पर 15 फीसदी टैक्स, 12-15 लाख के स्लैब पर 20 और 15 लाख रुपए से अधिक के स्लैब पर 30 फीसदी टैक्स है.

पुराने टैक्स स्लैब की दरें 

पुरानी टैक्स रिजीम में 2.5-5 लाख पर 5 लाख रुपए की आय पर 5 फीसदी का टैक्स है. 5 लाख से अधिक से लेकर 7.5 लाख तक की आय पर 15 फीसदी टैक्स है. 7.5 से ऊपर और 10 लाख रुपए तक 20 फीसदी टैक्स लिया जाता है. इसके बाद 10 लाख से अधिक से 15 लाख रुपए तक 30 फीसदी टैक्स है. नई टैक्स रिजीम में 12 लाख तक केवल 15 फीसदी टैक्स है जबकि पुरानी में 7.5 लाख के बाद से ही 20 फीसदी टैक्स शुरू हो जाता है.

10 लाख से कम आय वालों के लिए फायदेमंद 

नई टैक्स प्रणाली में बदलाव के बाद से 10 लाख रुपए से कम आय वाले लोगों के लिए यह और फायदेमंद हो गई है. क्योंकि 9 लाख रुपए तक की आय पर अपडेटेड न्यू टैक्स रिजीम में केवल 10 फीसदी ही टैक्स है. दूसरी ओर पुरानी टैक्स व्यवस्था में कर दाता को इतने ही वेतन पर 20 फीसदी टैक्स भरना पड़ सकता है. हालांकि, पुरानी यानी कि 2020 से पहले की टैक्स व्यवस्था में आपको कई निवेश पर छूट भी मिलती हैं. जैसे कि पीपीएफ, एजुकेशन पर खर्च और होम लोन आदि चुकाने की ऐवज में आप पुरानी कर व्यवस्था के अनुसार, छूट प्राप्त कर सकते हैं.

पुरानी टैक्स व्यवस्था में फायदे अधिक 

जान लीजिए कि आपकी आय 7 लाख रुपए है और आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था चुन रखी है तो आप आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत 1.5 लाख तक, 80डी के तहत 25,000 रुपए तक और 24 बी के तहत 75,000 लाख रुपए तक की छूट प्राप्त कर सकते हैं. इससे आपकी कर योग्य आय काफी कम हो जाएगी. दूसरी ओर, नई टैक्स व्यवस्था में आपको इनमें से कोई छूट नहीं मिलेगी और आपकी टैक्सेबल इनकम 7 लाख रुपए की रहेगी. कुल जमा यह कि आपको पुरानी टैक्स व्यवस्था में 7 लाख की सैलरी पर टैक्स बचाने के लिए कई जगह निवेश करना होगा और नई व्यवस्था में आज हुए बदलाव के बाद बिना कुछ किए ही आप पर टैक्स की शून्य देनदारी होगी.

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