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बीएमसी कमिश्नर के आदेश के बाद भी रोकी फाइल, सीपीडी के अधिकारी हुए निरंकुश

आईएनएस न्यूज नेटवर्क
मुंबई. मुंबई महानगरपालिका में कोविड के दौरान हुए घोटालों के आरोप के बाद भी बीएमसी के सेंट्रल परचेजिंग विभाग में बैठे अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. (File stopped even after BMC commissioner’s order, CPD officers became autocratic)

बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने दवा सप्लायरों का भुगतान करने का आदेश दिया था. बीएमसी कमिश्नर के आदेश के बाद भी 15 दिन बीत गए सीपीडी में बैठे अधिकारी फाइल दबा कर बैठे हैं. इस कारण से पिछले 15 दिनों से अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति ठप है. सीपीडी के अधिकारी इतने निरंकुश हो गए हैं कि कमिश्नर के आदेश को भी नहीं मान रहे हैं.

तीन अप्रैल को दवा सप्लायरों का एक प्रतिनिधिमंडल बीएमसी अतिरिक्त आयुक्त डॉ संजीव कुमार से सीपीडी द्वारा रोके गए बिलों के भुगतान की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह अस्पतालों को दवा व अन्य सामान की आपूर्ति बंद कर देंगे. उसके सप्लायरों ने दवाओं की आपूर्ति रोक दी थी.

 

बीएमसी अब तक दवा सप्लायरों के बिल का बीएमसी उन्हें भुगतान करती थी. लेकिन वंदना तांडेल, यजुर्वेद पाटिल जैसे अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं. दवा सप्लायरों के बिलों का भुगतान निर्माता कंपनी को किया जा रहा है. दवा सप्लायरों का कहना है कि इससे जीएसटी भरने में उन्हें परेशानी हो रही है. टेंडर कंपनी भरती है जबकि दवाओं की आपूर्ति डिस्ट्रीब्यूटर करते हैं. बीएमसी अस्पतालों को 500 से लाखों रुपए की दवाओं की आपूर्ति की जाती है. कंपनियां छोटी कीमत वाली दवाओं की आपूर्ति के लिए डिस्ट्रीब्यूटर निर्भर हैं. उनके द्वारा आपूर्ति की गई दवाओं का बिल निर्माता कंपनी के पास जाने के कारण डिस्ट्रीब्यूटर मुश्किल में फंस गए हैं.

 

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