
आईएनएस न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने आखिरकार इस्लाम को अलविदा कहते हुए सनातन धर्म अपना लिया है. इसके साथ ही उन्होंने अपना नाम बदलकर जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी रख लिया है.
इस्लाम छोड़कर हिन्दू बनने के बाद जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी (वसीम रिजवी) ने कहा, ”धर्म परिवर्तन की यहां कोई बात नहीं है, जब मुझे इस्लाम से निकाल दिया गया तो फिर मेरी मर्जी है कि मैं कौन सा धर्म स्वीकार करूं. सनातन धर्म दुनिया का सबसे पहला धर्म है, जितनी उसमें अच्छाइयां पाई जाती हैं, और किसी धर्म में नहीं है. इस्लाम को हम धर्म ही नहीं समझते. हर जुमे की नमाज के बाद हमारा सिर काटने के लिए फतवे दिए जाते हैं तो ऐसी परिस्थिति में हमको कोई मुसलमान कहे, इससे हमको खुद शर्म आती है.”
यति नरसिंहानंद ने कराया धर्म परिवर्तन
सोमवार को गाजियाबाद में यति नरसिंहानंद ने वसीम रिजवी को हिन्दू धर्म में शामिल कराया. इसके बाद जितेंद्र नारायण त्यागी यानी वसीम मंदिर में नजर आए. यहां उनके माथे पर त्रिपुंड था, उन्होंने गले में भगवा बाना पहना हुआ था और वो हाथ जोड़कर भगवान की पूजा कर रहे थे.
वसीम रिजवी लगातार अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं. पिछले काफी वक्त से वो ऐसे बयान देते आए हैं जिन्हें इस्लाम विरोधी और मुस्लिम विरोधी माना गया. मुस्लिम समाज में भी वसीम रिजवी के खिलाफ काफी गुस्सा देखने को मिला.
वसीम रिजवी ने एक किताब भी लिखी है जो इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के ऊपर है. इस किताब में भी उन्होंने इस्लाम धर्म और पैगंबर को लेकर ऐसी टिप्पणियां की हैं, जिनकी आलोचना की जा रही थी.
अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने वसीम के हिन्दु बनने पर कहा कि पूर्व मुस्लिम धर्मगुरु वसीम रिजवी साहब का हिंदू सनातन धर्म स्वीकार करना स्वागत योग्य, अखिल भारत हिंदू महासभा, संत महासभा उनका स्वागत करती है, वसीम रिजवी साहब अब हमारे हिंदू सनातन धर्म के अंग है कोई भी कट्टरपंथी उनके खिलाफ फतवा जारी करने करने की कोशिश न करें




