मेरा बेटा खून से लथपथ था, फिर भी उसने 180 लोगों को मरने नहीं दिया” – शूरवीर पायलट स्मित मच्छार के माता-पिता का छलका दर्द
35 हजार फीट पर कैसे हुआ था जानलेवा हमला?

इनसाइट न्यूज स्टोरी
मुंबई/ मुंबई के कैप्टन स्मित मच्छार ने वो कर दिखाया जो फिल्मों में भी नहीं होता। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाय दुबई फ्लाइट में 30 सितंबर को सह-पायलट के चाकू हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने 27 बच्चों सहित 180 यात्रियों की जान बचा ली। घाटकोपर (पूर्व) धवलगिरी निवासी इस वीर पायलट के माता-पिता *डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद* ने आज कहा – हमारा बेटा ही असली हीरो है। (My son was drenched in blood, yet he didn’t let 180 people die” – The anguish of brave pilot Smit Machhar’s parents spills over)
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में 30 सितंबर को जब सह-पायलट ने कॉकपिट में ही कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से जानलेवा हमला किया, तब हर किसी को लगा अब विमान क्रैश होगा। कॉकपिट खून से भर गया था। लेकिन घाटकोपर के इस मराठी लड़के जो किया, उसने पूरी दुनिया को रुला दिया।
खून से लथपथ हालत में भी स्मित ने 27 मासूम बच्चों समेत 180 यात्रियों की जान बचा ली और विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करा दी।आज घाटकोपर पूर्व के धवलगिरी में जब मुंबई की महापौर रितु तावड़े उनके घर पहुंचीं, तो स्मित के माता-पिता डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद की आंखें भर आईं।
माता-पिता ने कहा
> “हमें अपने बेटे पर गर्व है। डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर पर गहरे घाव हैं, लेकिन वो अस्पताल में भी सिर्फ यही पूछ रहा था कि ‘सब पैसेंजर ठीक हैं न?’। यही संस्कार हमने उसे दिए थे – अपनी जान से पहले दूसरों की जान। प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी उसकी तारीफ की, इससे बड़ा सम्मान क्या होगा एक माता-पिता के लिए।”
डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद ने बताया कि स्मित बचपन से ही जिद्दी था, पायलट बनने का सपना देखा और मुंबई की गलियों से निकलकर आज उसने 180 परिवारों को नया जीवन दिया है।
वार्ड नंबर 132 के इस सुपुत्र की कहानी आज हर मुंबईकर के मोबाइल में वायरल हो रही है। लोग कह रहे हैं – असली हीरो तो यही है। आप भी इस वीर पुत्र को सलाम करने के लिए इस खबर को शेयर करें।




