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BMC मिड-डे मील में बड़ा घोटाला? ब्लैकलिस्टेड संस्थाओं को फिर ठेका, स्थायी समिति में हंगामा

इनसाइट न्यूज स्टोरीज

मुंबई – बीएमसी स्कूलों के करीब 3 लाख छात्रों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर स्थायी समिति की बैठक में प्रशासन और सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। ब्लैकलिस्टेड संस्थाओं को फिर से काम देने, कुछ संस्थाओं के पास किचन की सुविधा ही न होने, खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतों और अनुभव प्रमाणपत्रों की जांच न होने के मुद्दे पर सदस्यों ने प्रशासन को घेरा।

शिक्षण समिति अध्यक्षा और स्थायी समिति सदस्या राजेश्री शिरवाडकर ने मांग की कि महिला बचत गटों को काम देकर उनका सशक्तिकरण किया जाए, लेकिन ब्लैकलिस्टेड संस्थाओं को दोबारा मौका देना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन संस्थाओं को पहले ब्लैकलिस्ट में क्यों डाला गया था, उन पर क्या कार्रवाई हुई, जांच में क्या खामियां मिलीं और ये रिपोर्ट प्रस्ताव के साथ क्यों नहीं जोड़ी गई।

“बच्चों के भोजन से जुड़े काम में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कुछ संस्थाओं की जांच में तो किचन ही मौजूद नहीं मिला, फिर भी उन्हें काम कैसे दिया गया? इसकी गहन जांच होनी चाहिए,” शिरवाडकर ने कहा।

*डॉ. सईदा खान* ने कुछ संस्थाओं को दी गई समय-वृद्धि पर सवाल उठाया और करार की अवधि, एक्सटेंशन का कारण, अनुभव प्रमाणपत्र और फील्ड विजिट रिपोर्ट का खुलासा करने की मांग की।

*अशरफ आजमी* ने खाने की गुणवत्ता का मुद्दा उठाया और पूछा कि शिक्षा विभाग के पास आई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने पूछा कि 147 ग्रुप कैसे बनाए गए, किस आधार पर संस्थाओं का चयन हुआ और बाकी संस्थाओं की चयन प्रक्रिया क्या है। “मध्यान्ह भोजन का उद्देश्य सिर्फ एक वक्त का खाना देना नहीं, बल्कि पोषणयुक्त आहार देना है। 3 लाख बच्चों पर इतना खर्च हो रहा है तो क्या उन्हें तय कैलोरी और प्रोटीन मिल रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए,” उन्होंने स्वतंत्र जांच दल बनाने की मांग की।

*प्रीति सातम* ने भी कैलोरी-प्रोटीन की जांच और मेन्यू में विविधता लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सिर्फ खिचड़ी नहीं, बल्कि ज्यादा पौष्टिक विकल्प दिए जाएं।

बैठक में इस्कॉन जैसी संस्थाओं के सेंट्रल किचन मॉडल का विकल्प भी रखा गया, जिसमें बड़े पैमाने पर खाना बनने से गुणवत्ता, सफाई और पोषण पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकता है। साथ ही महिला बचत गटों को भी इसमें शामिल करने की मांग हुई।

प्रशासन की ओर से अतिरिक्त आयुक्त *डॉ. अविनाश ढाकणे* ने कहा कि कुछ संस्थाएं अच्छा काम कर रही हैं, लेकिन छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आहार देना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। गुणवत्ता, स्वच्छता और संस्थाओं के काम की जांच और कड़ी की जाएगी। महिला बचत गटों को अवसर देते हुए भी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। संस्थाओं की पात्रता, अनुभव और इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

चर्चा के बाद अध्यक्ष ने संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, लेकिन प्रशासन सेंट्रल किचन, पोषण मूल्य और महिला बचत गटों की भागीदारी पर नीतिगत बदलाव पर विचार करेगा।

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