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मनपा के दवा खरीद भ्रष्टाचार की होगी उच्चस्तरीय जांच

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने दिए जांच के आदेश

आईएनएस न्यूज नेटवर्क

मुंबई. मुंबई महानगरपालिका के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों के दवाओं की खरीद में हो रहे भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराने की घोषणा चिकित्सा मंत्री मंत्री उदय सामंत ने की. विधानसभा में दवाओं की खरीद पर आधे घंटे की चर्चा में कई सदस्यों ने हिस्सा लेकर गंभीर आरोप लगाए. विधायक व मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार ने अस्पतालों में दवा खरीद पत श्वेत पत्र निकालने की मांग की जिसे चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया. ( High-level inquiry into the drug procurement corruption of Municipal Corporation Cpd Department)

आज सुबह विधानसभा की विशेष कार्यवाही में मुंबई में स्वास्थ्य देखभाल पर आधे घंटे की चर्चा में विधायक अमीन पटेल ने दवा खरीद घोटाले का आरोप लगाया. इस चर्चा में भाग लेते हुए विधायक एडवोकेट आशीष शेलार ने सदन के सामने मुंबई में स्वास्थ्य देखभाल का विवरण प्रस्तुत किया. आशीष शेलार ने कहा कि चूंकि मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है, इसलिए महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों से भी मरीज बड़ी संख्या में मुंबई उपचार के लिए आते हैं. मुंबई में कई अस्पताल हैं महानगरपालिका, राज्य सरकार, निजी, धर्मार्थ और केंद्रीय श्रमिक अस्पताल और इन सभी के बीच कोई सामंजस्य नहीं है. तो एक बार सरकार इस सब की व्यापक समीक्षा करे कि मुंबई में कितने मरीज़ आते हैं, क्या उनके लिए अस्पताल पर्याप्त उपलब्ध हैं?

 शेलार ने मांग की कि इस पर कितना खर्च किया गया है, इस पर एक श्वेत पत्र तैयार किया जाना चाहिए. चैरिटी कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अस्पतालों को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं और अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की समीक्षा और सत्यापन किया जाना चाहिए. दूसरी मांग विधायक शेलार ने किया कि क्या उनके द्वारा सरकार की शर्तों का पालन किया जाता है. मुंबई मनपा स्वास्थ्य पर प्रति वर्ष लगभग 4000 करोड़ रुपए खर्च करता है, पांच साल में 20000 करोड़ रुपए स्वास्थ्य व्यवस्था पर खर्च किया जाता है.

शेलार ने कहा कि इसमें बहुत भ्रष्टाचार है. जिस तरह से मुंबईकर टैक्स देते हैं उसके अनुसार  उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलतीं, एक तरफ मनपा हर पांच साल में 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करती है और मरीजों को दवाएं नहीं मिलतीं.  अस्पताल में जाने वाले मरीजों को दवा, एक्स-रे, सोनोग्राफी के लिए बाहर भेज दिया जाता है.  इसमें भारी भ्रष्टाचार है. उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की.

उन्होंने कहा कि  सरकार को निजी अस्पतालों में दी जाने वाली दवाओं और इंजेक्शनों के लिए टैरिफ की घोषणा करनी चाहिए क्योंकि कीमतें अत्यधिक हैं, इसलिए मरीजों को भारी परेशानी होती है. इस  चर्चा के दौरान विधायक मनीषा चौधरी ने भी उपनगरीय स्वास्थ्य सेवा का मुद्दा उठाया. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री उदय सामंत ने मुंबई में स्वास्थ्य देखभाल पर एक श्वेत पत्र की आवश्यकता को स्वीकार किया और यह भी घोषणा की कि मुंबई मनपा अस्पताल में दवाओं की खरीद की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी.

मनपा का सीपीडी भ्रष्टाचार का अड्डा

मुंबई महानगरपालिका का सीपीडी विभाग भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा है. मनपा अस्पतालों में दवाओं की खरीद की जिम्मेदारी इसी विभाग पर रहती है. यहां असिस्टेंट डीन वंदना तांडेल, युवराज पाटिल जैसे अधिकारी अस्पतालों में दवा खरीद के जिम्मेदार हैं. इनका तबादला होने के बाद भी ये अधिकारी सीपीडी विभाग को छोड़ कर जाना ही नहीं चाहते. मनपा के किस अधिकारी के दबाव में इन अधिकारियों को रोका गया है इसकी भी जांच होनी चाहिए.

अभय पांडे

अध्यक्ष, ऑल फूड एंड एंड ड्रग्स लायसेंस होल्डर्स फाउंडेशन

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